स्वारघाट में खोली जाए दमकल चौकी

स्वारघाट—उपमंडल उपमंडल स्वारघाट में फायर स्टेशन न होने के चलते लोग हर साल गर्मियां शुरू होते ही भगवान से आगजनी से बचाव की प्रार्थना करते हैं। क्षेत्रवासियों द्वारा बार-बार मांग किए जाने के बावजूद सरकार की इस मामले में बेरुखी अभी भी बरकरार है। किसी भी सरकार ने क्षेत्रवासियों के घरों एवं निजी संपत्ति की चिंता होना तो दूर तहसील कार्यालय, एसडीएम कार्यालय, बीडीओ ब्लॉक, कृषि प्रसार केंद्र, पशु निरीक्षण संस्थान, उद्यान प्रसार केंद्र, सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य उपमंडल कार्यालय, लोक निर्माण विभाग उपमंडल कार्यालय, विश्राम गृह, प्राथमिक चिकित्सा केंद्र, वन परिक्षेत्र कार्यालय एवं विश्राम गृह, विद्युत उपकेंद्र स्वारघाट व राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला जैसी करोड़ों रुपए की सरकारी संपत्ति तथा इन भवनों में मौजूद लोगों को भी आग से बचाने की चिंता नहीं है। स्वारघाट से 26 किलोमीटर दूर नयनादेवी में दमकल चौकी खोली गई है। स्वारघाट में अगर आगजनी की कोई घटना हो जाए तो नयनादेवी से दमकल वाहन पहुंचने में करीब डेढ़ घंटा लग जाता है, तो वहीं अगर एनएच पर जाम हो तो वाहन पहुंचने में कई घंटे लग जाते हैं। तब तक आग जान-माल का नुकसान कर चुकी होती है। वहीं वन विभाग के कर्मचारियों के पास आग बुझाने के लिए आधुनिक उपकरण नहीं हैं। मौजूदा दौर में एक ओर जहां प्रदेश के कुछ हिस्सों में हेलिकाप्टर से जंगलों में आग बुझाने की नई तकनीक इस्तेमाल की जा रही है, वहीं स्वारघाट में सरकार ग्रामीणों की निजी संपत्ति पूरी तरह जल जाने के बाद थोड़ी बहुत राहत राशि जारी करती है। स्वारघाट क्षेत्र के ग्रामीण आग लगने की सूरत में या तो भगवान पर भरोसा करते हंै या फिर अपने स्तर पर जान जोखिम में डालकर आग बुझाने की कोशिश करते हैं। स्थानीय जनता ने स्वारघाट में दमकल चौकी खोलने की मांग की है।

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