हक के लिए सड़कोंं पर उतरे जेबीटी

बीएड अभ्यर्थियों को जेबीटी कमीशन से हटाने की मांग को लेकर डीसी आफिस तक निकाली रैली

धर्मशाला—बीएड को जेबीटी कमीशन में बिठाने पर भावी शिक्षकों ने आक्रोशित होकर प्रचंड गर्मी में सड़कों पर उतरकर आक्रोश रैली निकाली है। इसमें भविष्य के शिक्षकों ने अपना भविष्य सुरक्षित बनाने के लिए तेज धूप में भी सड़कों में उतरकर पसीना बहाकर अपना हक प्रदेश सरका व शिक्षा विभाग से मांगा  है।  जेबीटी डाइट संस्थान धर्मशाला, ज्ञान ज्योति राजोल, शरण जेबीटी कालेज मटौर सहित कांगड़ा संस्थान के प्रशिक्षुओं ने मंगलवार को अपनी कक्षाओं का बहिष्कार किया। अपनी मांगों के संदर्भ में पुलिस ग्राउंड धर्मशाला से जिलाधीश कार्यालय धर्मशाला तक एक रोष स्वरूप रैली निकाली। इसमें शिक्षा विभाग एवं प्रदेश सरकार से अपनी  मांगों के संदर्भ में नारेबाजी की एवं जिलाधीश कांगड़ा के माध्यम से मुख्यमंत्री को अपनी मांगों के संदर्भ में एक ज्ञापन भी दिया, जिसमें उन्होंने बीएड प्रशिक्षुओं को जेबीटी के कमीशन में बिठाने पर रोष व्यक्त किया है। जेबीटी प्रशिक्षुओं का कहना है कि हाल ही में 12 मई को हिमाचल प्रदेश सुबोर्डिनेट बोर्ड हमीरपुर द्वारा जेबीटी डीएलएड की कमीशन परीक्षा का आयोजन किया गया। इसमें 36 हजार अभ्यर्थी बैठे थे, जिसमें बीएड अभ्यर्थियों की संख्या लगभग 33 हजार के करीब थी तथा जेबीटी डीएलएड अभ्यर्थियों की संख्या मात्र तीन हजार के करीब रही। जेबीटी कर रहे प्रशिक्षुओं का कहना है कि सभी डीएलएड या जेबीटी प्रशिक्षुओं के साथ यह अन्याय हो रहा है एवं  सरकार से इस अन्याय को रोकने हेतु प्रयास करने की मांग की है, ताकि जेबीटी डीएलएड के छात्रों के साथ समय और भविष्य बर्बाद न  हो।  प्रशिक्षुओं का कहना है कि बीएड वालों को जेबीटी के कमीशन के लिए अनुमति न दी जाए। हिमाचल प्रदेश में पहले ही करीब 20 हजार से अधिक जेबीटी प्रशिक्षित सरप्लस बेरोजगार चल रहे हैं। उनका कहना है कि यह कमीशन कैंसिल किया जाए, क्योंकि बीएड वालों के पास न्यूनतम योग्यता जेबीटी टेट नहीं है। बीएड वाले छठी कक्षा से आठवीं कक्षा तक पढ़ाने वाले हैं, जबकि जेबीटी वाले प्रथम कक्षा से पांचवी कक्षा तक पढ़ाते हैं। उनका कहना है कि यह योग्य ही नहीं है इस कारण जेबीटी कर रहे प्रशिक्षण चाहते हैं कि बीएड वाले जेबीटी पोस्ट के लिए एलिजिबल ही नहीं है। जेबीटी प्रशिक्षुओं को कहना है कि नवंबर 2017 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्णय लिया गया था कि उच्च योग्यता रखने वाले अभ्यर्थी निम्न योग्यता रखने वाले अभ्यर्थियों के साथ किसी भी रूप में परीक्षा में मान्य नहीं होगा।

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