हजार वोट भी न ले पाए 15 प्रत्याशी

45 उम्मीदवारों में हमीरपुर के आशीष को पड़े सबसे कम 330 वोट

पालमपुर —लोकसभा चुनावों में जहां एक ओर भाजपा उम्मीदवारों की झोली वोटों से भर गई और जीत का अंतर भी लाखों में रहा, वहीं कुछ ऐसे भी नेता मैदान में रहे, जिनकी वोटों की संख्या एक हजार तक भी नहीं पहुंच पाई। प्रदेश के चार लोकसभा क्षेत्रों में चुनाव मैदान में उतरे 45 उम्मीदवारों में से 15 प्रत्याशी एक हजार का आंकड़ा भी नहीं छू पाए।  ऐसे उम्मीदवारों की सबसे ज्यादा संख्या मंडी सीट पर रही, जहां छह उम्मीदवार हजार मतों को भी तरस गए। एक हजार वोट प्राप्त न कर पाने वाले उम्मीदवारों में पांच कांगड़ा, तो चार हमीरपुर सीट से हैं। कांगड़ा सीट से भाजपा के किशन कपूर ने सात लाख से ज्यादा वोट हासिल कर एक नया रिकार्ड बनाया, तो हमीरपुर सीट से आशीष का खाता 330 वोटों में ही सिमट गया।  कांगड़ा सीट पर जहां नोटा का ग्राफ  ही 11 हजार को पार कर गया, वहीं स्वरूप सिंह 959, सुभाष 970, चंद्रभान 564 व नरेंद्र 908 वोट ही प्राप्त कर पाए। हमीरपुर सीट में तुलसी राम 775, राम सिंह 473, अशोक 412, प्रवीण 699 और आशीष 330 वोट ही हासिल कर पाए। मंडी सीट में करतार 880, खेम चंद 511, चंद्रमणि 505, मेहर सिंह 582, शिव लाल 751 और घनश्याम 775 वोटों में ही सिमट गए।  शिमला सीट से उम्मीदवारों का प्रदर्शन इनसे कुछ बेहतर रहा और वहां सबसे कम वोटों का आंकड़ा 3216 रहा। कांग्रेस व भाजपा उम्मीदवारों के अलावा मंडी सीट से ही दो उम्मीदवार अपने संसदीय क्षेत्र में नोटा के वोटों से अधिक मत हासिल कर सके। अन्य तीनों संसदीय क्षेत्रों में कांग्रेस व भाजपा के सिबाय बाकी प्रत्याशी नोटा के वोटों से भी पिछड़ गए।

रही-सही कसर नोटा ने निकाली

बेशक 15 उम्मीदवार इस बार लोकसभा चुनाव में हजार का आंकड़ा न छू पाए, लेकिन इसमें नोटा का भी रोल रहा। अगर 32 हजार वोटरों ने नोटा न दबाया होता, तो शायद ये उम्मीदवार हजार के आंकड़े से कहीं आगे निकल जाते। मंडी संसदीय क्षेत्र में तो दो प्रत्याशी नोेटा से अधिक वोट भी न ले सके।

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