हलकी सी चिंगारी और सूरत जैसी तबाही

गगरेट—स्कूल सरकारी हैं। यहां साधन संपन्न परिवारों के बच्चे अब नहीं पढ़ते। यहां पढ़ने आते हैं जरूरतमंद परिवारों के वे बच्चे जिनके परिजन निजी स्कूलों की फीस अदा करने में असमर्थ हैं। शायद यही वजह है कि अधिकांश सरकारी स्कूलों में भविष्य संवारने आ रहे इन विद्यार्थियों की जिंदगी लापरवाही के एक्सटिंगुशर जोखिम में डाल रहे हैं। गुजरात के सूरत में एक कोचिंग सेंटर में हुए दर्दनाक हादसे के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या अग्निकांड होने की सूरत में जिले के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की जान सुरक्षित है। हालांकि कुछ अरसा पहले उच्चतम न्यायालय ने भी स्कूलों में अग्निशमन यंत्र स्थापित करने के निर्देश जारी किए थे लेकिन लापरवाही का आलम यह है कि कई सरकारी स्कूलों में अभी भी अग्निशमन यंत्र स्थापित नहीं हो पाए हैं। जहां हुए भी हैं वहां महज खानापूर्ति ही की गई है। गुजरात के सूरत में एक कोचिंग सेंटर में लगी आग अचानक बीस भविष्य लील गई। ऐसे में सवाल यह है कि अगर कहीं ऐसा हादसा जिले के शिक्षण संस्थान में हुआ तो क्या आग लगने पर ही कुआं खोदा जाएगा? शायद अभी तक यहां कोई हादसा हुआ नहीं है तो इस ओर संबंधित महकमे के अधिकारियों का भी ध्यान नहीं गया है। जिले में मौजूदा समय में 498 प्राइमरी स्कूल, 132 निजी स्कूल, 95 वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल, 48 उच्च विद्यालयों के साथ मिडल स्कूल भी देश के भविष्य में शिक्षा की अलख जगा रहे हैं। बेशक विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए कई मानक तय किए गए हैं लेकिन क्या ये स्कूल तय मानकों पर खरा उतर रहे हैं या नहीं इसे लेकर शिक्षा विभाग भी कभी गंभीर नहीं दिखा। जाहिर है कि सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील भी पकता है। ऐसे में हर रोज इन स्कूलों में आग जलती हैं। बेशक इन स्कूलों में मिड-डे मील पकाने के लिए एलपीजी का प्रयोग किया जाता है लेकिन एलपीजी आग भड़काने का काम नहीं कर सकती ऐसा भी नहीं है। उच्चतम न्यायालय के आदेश पर करीब डेढ़ साल पहले शिक्षा विभाग ने स्कूलों में सुरक्षा के लिहाज से अग्निशमन यंत्र स्थापित करवाने के लिए लिखित आदेश जारी किए थे लेकिन साल दर साल इसकी निगरानी नहीं हो रही है कि किन-किन स्कूलों मे इन आदेशों का पालन किया है और इनका रखरखाव सही ढंग से हो पा रहा है या नहीं। उधर शिक्षा उपनिदेशक बीआर धीमान से बार-बार संपर्क करने पर भी उनसे संपर्क नहीं हो पाया जबकि शिक्षाविद सेवानिवृत प्रिंसीपल रविंदर शर्मा का कहना है कि जिले के किसी शिक्षण संस्थान में ऐसा भयानक हादसा न हो, इसके लिए शिक्षा विभाग समय पर जागे और हर स्कूल में अग्निशमन यंत्र स्थापित करवाना सुनिश्चित करे।

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