हिंदी पत्रकारिता दिवस

30 मई हिंदी पत्रकारिता दिवस मनाया जाता है। हिंदी पत्रकारिता की शुरुआत बंगाल से हुई थी, जिसका श्रेय राजा राममोहन राय को दिया जाता है। अपने लेख ‘हिंदी के दैनिक पत्र’ में आचार्य शिवपूजन सहाय ने लिखा था कि ‘लोग दैनिक पत्रों का साहित्यिक महत्त्व नहीं समझते, बल्कि वे उन्हें राजनीतिक जागरण का साधन मात्र समझते हैं। आज के समय में समाचार पत्र एक बहुत बड़ा व्यवसाय बन चुका है। मीडिया ने आज सारे विश्व में अपनी एक खास पहचान बना ली है। हिंदी पत्रकारिता ने एक लंबा सफर तय किया है। जब पंडित जुगल किशोर शुक्ल ने ‘उदन्त मार्तण्ड’ को रूप दिया, तब किसी ने भी यह कल्पना नहीं की थी कि हिंदी पत्रकारिता इतना लंबा सफर तय करेगी। जुगल किशोर शुक्ल ने काफी दिनों तक ‘उदंत मार्तण्ड’ को चलाया और पत्रकारिता करते रहे, लेकिन आगे के दिनों में ‘उदंत मार्तण्ड’ को बंद करना पड़ा था। यह इसलिए बंद हुआ, क्योंकि पंडित जुगल किशोर के पास उसे चलाने के लिए पर्याप्त धन नहीं था। वर्तमान में बहुत-से लोग पत्रकारिता के क्षेत्र में पैसा लगा रहे हैं। यह एक बड़ा कारोबार बन गया है, जो हिंदी का ‘क ख ग’ भी नहीं जानते, वे हिंदी में आ रहे हैं। 192 वर्षों में हिंदी अखबारों एवं समाचार पत्रकारिता के क्षेत्र में काफी तेजी आई है। साक्षरता बढ़ी है। पंचायत स्तर पर राजनीतिक चेतना बढ़ी है। इसके साथ ही साथ विज्ञापन भी बढ़े हैं। हिंदी के पाठक अपने अखबारों को पूरा समर्थन देते हैं। महंगा, कम पन्ने वाला और खराब कागज वाला अखबार भी वे खरीदते हैं। अंग्रेजी अखबार बेहतर कागज पर ज्यादा पन्ने वाला और कम दाम का होता है। हिंदी पत्रकारिता की शुरुआत बंगाल से हुई और इसका श्रेय राजा राममोहन राय को दिया जाता है। राजा राममोहन राय ने ही सबसे पहले प्रेस को सामाजिक उद्देश्य से जोड़ा। भारतीयों के सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक, आर्थिक हितों का समर्थन किया। समाज में व्याप्त अंधविश्वास और कुरीतियों पर प्रहार किए और अपने पत्रों के जरिए जनता में जागरूकता पैदा की। राममोहन राय ने कई पत्र शुरू किए जिसमें अहम हैं। साल 1816 में प्रकाशित ‘बंगाल गजट’। बंगाल गजट भारतीय भाषा का पहला समाचार पत्र है। इस समाचार पत्र के संपादक गंगाधर भट्टाचार्य थे। इसके अलावा राजा राममोहन राय ने ‘मिरातुल, संवाद कौमुदी, बंगाल हैराल्ड’ पत्र भी निकाले और लोगों में चेतना फैलाई।  ‘उदंत्त मार्तण्ड’ को हिंदी का पहला समाचार पत्र माना ।

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