हिमाचल में लोकसभा चुनाव फिक्स

मेजर विजय सिंह मनकोटिया का आरोप; अपने केस दबाने के लिए वीरभद्र की भाजपा से साठगांठ, अपने बयानों से कांग्रेस प्रत्याशियों को कर रहे कमजोर

धर्मशाला   -पूर्व मंत्री मेजर विजय सिंह मनकोटिया ने लोस चुनावों के अंतिम दौर में चुप्पी तोड़ते हुए पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को निशाने पर लिया है।  उन्होंने आरोप लगाया कि वीरभद्र सिंह अपने केस दबाने के लिए भाजपा से सांठगांठ कर अपनी ही पार्टी के प्रत्याशियों के खिलाफ बयान दे रहे हैं। मंडी, शिमला और हमीरपुर जहां भी जा रहे हैं, वहां कुछ न कुछ विरोधाभाषी बयान दे रहे हैं। मेजर ने कहा कि वीरभद्र के खिलाफ कब की चार्जशीट तैयार हुई है, लेकिन कार्रवाई नहीं हो रही है। इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि हिमाचल में किस तरह की सियासत चल रही है। उन्होंने कहा कि राजनीति में बहुत गिरावट आ चुकी है। पूर्व मंत्री मेजर विजय सिंह मनकोटिया ने एक बार फिर से सियासी मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने हिमाचल में लोकसभा चुनाव को फिक्स बताते हुए पूर्व मुख्यमंत्री पर राजनीतिक माहौल बिगाड़ने के आरोप लगाए। मेजर ने कहा कि राजनीति में आई गिरावट और पार्टी व सांसद के बजाय एक व्यक्ति के नाम पर मतदान करने के अभियान को देखते हुए देश में राष्ट्रपति प्रणाली को लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे हालात मेें फिर सीधे जनता ही तय करे कि राष्ट्रपति कौन होगा। उन्होंने कहा कि अमरीका, फ्रांस सहित अन्य देश देशों की तरह भारत में नई प्रणाली लाई जानी चाहिए। इसके लिए राष्ट्र स्तर पर डिवेट होना चाहिए। मेजर ने कहा कि राहुल ऊना रैली में वीरभद्र को अपना गुरु बता रहे हैं। लेकिन इस गुरु ने हिमाचल में चेले बनाए हुए हैं, उनकी संपत्ति की भी जांच होनी चाहिए कि  उनके पास कुछ समय में ही यह संपत्ति कहां से आई। मेजर ने कहा कि वीरभद्र ने कांगड़ा से जो भी नेतृत्व करने वाला लीडर उभरा उसे समाप्त करने की सियासत खेली है। कांग्रेस हिमाचल में एक भी सीट जीतने वाली नहीं है।  मनकोटिया ने कांग्रेस पार्टी पर परिवारवाद से बाहर न निकलने वाली पार्टी करार देते हुए एक लिखित पर्चा वितरित किया।  इसमें वीरभद्र सिंह के पूरे परिवार सहित जिला के सभी 15 विधानसभा क्षेत्रों में किस तरह पीढ़ी दर पीढ़ी कांग्रेस केे लोग आए हैं उसे दिखाया है। साथ ही आम कार्यकर्ताओं से आह्वान किया है कि इस पार्टी के कार्यकर्ता के लिए कोई वैकेंसी नहीं है। या तोकिसी परिवार से नेता बन सकता है या फिर उनके किसी खास दुलारे को टिकट मिलेगी। आम कार्यकर्ता का कोई स्थान नहीं है।   

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