हिमाचल में हर रोज़ आठ एक्सीडेंट

इस साल चार महीने में ही 912 हादसों में 336 लोगों ने गंवाई जान, 912 घायल

पालमपुर – प्रदेश की सड़कें हर दिन औसतन आठ दुर्घटनाओं का गवाह बन रही हैं। सड़कों की खराब हालत, यातायात नियमों का पालन न करना और तेज रफ्तारी, इनमें कारण चाहे कोई भी हो, रोजाना तीन लोग असमय मौत का ग्रास बन रहे हैं। साल के पहले चार माह में ही प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं के  912 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें 336 लोगों की जान चली गई और 912 घायल हुए। कांगड़ा, शिमला और मंडी जिला में चार महीने में ही सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ सौ का आंकड़ा पार कर चुका है, तो ऊना और सिरमौर जिला भी सौ को छू रहे हैं। जानकारों के अनुसार दोपहिया वाहन चालकों द्वारा हेल्मेट न पहनना व तेज रफ्तार से चलना काफी घातक साबित हो रहा है। वहीं, बड़े वाहनों में लापरवाही से वाहन चलाने के साथ कई जगह सड़कों की खस्ताहालत भी एक्सीडेंट का कारण बन रही है। यातायात नियमों के पालन को लेकर जागरूकता शिविरों का आयोजन किया जाता रहा है, वहीं स्कूली बच्चों को भी यातायात संबंधी आवश्यक जानकारी दी जा रही है, बावजूद इसके सड़क दुर्घटनाओं में कमी न आना और उसमें जाने वाली जानों की संख्या चिंता का विषय बनती जा रही है। तेज गति से वाहन दौड़ाने को प्रदेश का युवा अपना शौक बना रहे हैं और किशोर वाहन चालकों द्वारा रैश ड्राइविंग के कारण राह चलते लोगों को चोट पहुंचाने के मामलों की संख्या के आधार पर प्रदेश चिंताजनक तौर से राष्ट्रीय स्तर पर टॉप-टेन प्रदेशों की सूची में शामिल रहा है। जनवरी से अप्रैल तक सबसे अधिक 159 सड़क दुर्घटनाएं जिला कांगड़ा में हुई हैं, तो 148 सड़क हादसों के साथ जिला शिमला इस सूची में दूसरे स्थान पर है। मंडी में इस अवधि में 115 सड़क हादसे दर्ज किए हैं, तो जिला ऊना में यह आंकड़ा 96 और जिला सिरमौर में 90 रहा है।

2012-13 में थोड़ी राहत

2018 में पहले चार महीने में प्रदेश में 1002 सड़क दुर्घटनाओं में 399 लोगों की मौत हुई थी और 1714 लोग घायल हुए थे। पिछले एक दशक के दौरान सिर्फ 2012 और 2013 को छोड़ अन्य वर्षों में प्रदेश में हर साल तीन हजार से ज्यादा सड़क हादसे सामने आए हैं, जिनमें मरने वालों का आंकड़ा एक हजार से ज्यादा रहा है।

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