हिमाचल हाई कोर्ट में फुल कोर्ट रेफरेंस

सूर्यकांत के सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त होने पर विशेष कार्यक्रम 

शिमला -हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किए जाने पर उनके सम्मान में फुल कोर्ट रेफरेंस का आयोजन किया गया। न्यायाधीश सूर्यकांत ने पांच अक्तूबर, 2018 को प्रदेश के मुख्य न्यायाधीश का कार्यभार संभाला था। इस मौके पर हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश कुरियन जोसेफ, हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश एके गोयल, कुलदीप सिंह, वीके शर्मा, महाधिवक्ता अशोक शर्मा, बार एसोसिएशन के प्रधान राजीव जीवन, प्रदेश बार काउंसिल के चेयरमैन रमाकांत शर्मा, और असिस्टेंट सोलिसिटर जनरल ऑफ  इंडिया राजेश कुमार आदि उपस्थित थे। न्यायाधीश सूर्यकांत का जन्म 10 फरवरी, 1962 को हिसार जिला में हुआ। प्रारंभिक पढ़ाई उन्होंने गांव के ही स्कूल से की और वर्ष 1984 में महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी रोहतक से विधि की डिग्री हासिल की। 1984 में वह जिला न्यायालय हिसार में वकालत शुरू की और वर्ष 1985 से चंडीगढ़ में वकालत शुरू की। सात जुलाई, 2000 को उन्हें हरियाणा का महाधिवकता तैनात किया गया और मार्च, 2001 में इन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता बनाया गया। 2011 में उन्होंने विधि में स्नातकोत्तर डिग्री हासिल की। 9 जनवरी, 2004 को उन्हें पंजाब एवं हरियाणा का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था।

धर्मचंद चौधरी ने संभाला कार्यभार

प्रदेश हाई कोर्ट में बतौर मुख्य न्यायाधीश करेंगे काम

शिमला -प्रदेश हाई कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश धर्मचंद चौधरी ने गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश कार्यालय का चार्ज संभाला। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति होने के पश्चात उन्हें केंद्रीय कानून मंत्रालय ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया है। न्यायाधीश धर्मचंद चौधरी का जन्म एक कृषक परिवार में 12 मार्च, 1958 गांव लोहारा, तहसील सदर, जिला मंडी में हुआ था। सरकारी प्राइमरी स्कूल, लोहारा से प्राथमिक शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने हटगड, से मैट्रिक उत्तीर्ण की। राजकीय डिग्री कालेज, कुल्लू से स्नातक और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से वर्ष 1983 में एलएलबी की डिग्री प्राप्त की। 10 मई, 1983 में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में बतौर अधिवक्ता काम शुरू किया। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष और सचिव के रूप में पद संभाला। वर्ष 1993-94 और 1994-95 के दौरान उपाध्यक्ष और हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष बने। वह हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में केंद्र सरकार के वकील भी रहे। इसके अलावा वह खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड, एचपी राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादक रूस, एचपी अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति विकास निगमए हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय  पालमपुर के मामलों की पैरवी हिमाचल प्रदेश के उच्च न्यायालय करते रहे। 1994 में वह अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश नियुक्त हुए। 

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