106 वर्षीय सेरी देवी को सड़क का इंतजार

बांह गांव में आज भी मूलभूत सुविधाआंे का अभाव, चुनाव का बहिष्कार भी किया फिर भी नहीं हुआ निर्माण

 संधोल -रबांह गांव की 106 वर्षीय सेरी देवी भले ही दशकों से कभी आम चुनाव तो कभी विधानसभा के दर्जनों चुनावों में भाग लेकर लोकतंत्र को मजबूती तो देती आई है लेकिन बदले में सरकारों में यहां से नेतृत्व कर रहे प्रतिनिधियों से ये बजुर्ग बेहद खफ ़ा है क्योंकि इसके गांव बांह सहित चतरोन, अपर शेड, लोअर शेड, चेलबल्हि, मसौत व कंद्रोह मिलाकर आधा दर्जन गांव आजादी के सात दशकों के बाद भी सड़क सुविधा से महरूम हैं। डेढ़ ढशक पहले इन गांव को सड़क से जैसे कैसे जोड़ा भी तो महज एक जुगाड़ू सड़क के जरिए जो महज़ 6 महीने ही खुलती है। ऐसे में गुस्साये ग्रामीणों ने पिछले विधान सभा के चुनावों का बहिष्कार किया तो यह गांव प्रदेश भर में सुर्खियां ही बन गया। पिछले विधानसभा चुनावों में इस गांव में एक ही मत पड़ा था। जिसे जबरदस्ती एक महिला अधिकारी ने स्थानीय बीएलओ से डलवाया था, लेकि़न जबरदस्ती नोकरी बचाने और समाज के भय के चलते वो महिला वोट डालने के बाद बेहोश भी हो गई थी। जब बहिष्कार की गूंज देहली तक पहुंची तो प्रदेश सरकार ने इस सड़क को प्रधानमंत्री सड़क योजना में डाल कर इसका निर्माण शुरू तो किया लेकिन कछुआ चाल चले इसका कार्य कब मुक्कमल होगा ये कोई भी नही जानता। पिछले साल नवंबर में इसका टेंडर लगा था जिसको 20 नंवबर तक मुक्कमल होना था लेकिन महज सात किलोमीटर सड़क के लिए निर्माण कार्य पच्चीस फ ीसदी भी पूरा नही हुआ। ऊपर से पिछले दो माह से काम बंद पड़ा है और ठेकेदार भी गायब है। ऐसे में काम कब तक पूरा होगा इसका अंदाजा सहजता से लगाया जा सकता है। ग्रामीणों में कांता देवी, कौल सिंह, अमर सिंह, लछमण, टेक चंद, अनु ठाकुर, अमरी देवी, शकुंतला, मीरा और भूरी सिंह का कहना है  कब नेता व अधिकारी गांव की समस्या को समझेंगे। वंही अपनी चार पीढि़यों को देख चुकी 106 वर्षीय सेरी देवी को अभी भी उम्मीद है कि शायद इतने बड़े जीवन को देखने के बाद उसके गांव की सड़क पक्की हो जाए।

 

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