42.66 करोड़ की बागबानी तबाह

हिमाचल में ओलावृष्टि ने सेब को लगाई करोड़ों की चपत, शिमला-मंडी-कुल्लू में खूब बरपा कहर

शिमला   – हिमाचल में ओलावृष्टि बागबानी को करोड़ोें की चपत लगा चुकी है। शिमला, मंडी व कुल्लू में ओेलावृष्टि ने सबसे ज्यादा कहर बरपाया है। पहाड़ी प्रदेश में दो महीने के दौरान ही ओलावृष्टि 42.66 करोड़ की फसल तबाह कर चुकी है, जबकि राज्य में अभी भी बागबानी पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। मौसम के मिजाज ने बागबानों के रातों की नींद उड़ा दी है। प्रदेश में अप्रैल के दौरान जमकर ओलावृष्टि हुई थी। राज्य में अकेले अप्रैल के दौरान 39.56 करोड़ की संपति को नुकसान पहुंचा था। राज्य में मई महीने के दौरान भी ओलावृष्टि हुई थी। शिमला के साथ-साथ मंडी व कुल्लू में भी ओलावृष्टि व तूफान से सेब सहित स्टोन फ्रूट की फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है। ओलावृष्टि से सबसे ज्यादा नुकसान जिला शिमला में हुआ है। शिमला में ओलावृष्टि से 80 फीसदी नुकसान हुआ है। इसके अलावा दूसरे नंबर पर मंडी और कुल्लू में तीसरे स्थान पर नुकसान पहुंचा है। उद्यान विभाग के आकलन तहत ओलावृष्टि ने फसल को काफी नुकसान पहुंचाया है। भरमौर के पूलन, खंणी, गरीमा व संचूई पंचायत के भीतर ओले पड़ने से सेब और अन्य फलदार पौधों को नुकसान हुआ है। जिला शिमला  के कुमारसैन, मतियाना, ठियोग, चौपाल, नेरवा, कुफरी और कोेटखाई में ओलावृष्टि से सेब सहित स्टोन फ्रूट को भारी नुकसान पहुंचा है। बागबानी  विभाग के आकलन के तहत राज्य में 3.06 करोड़ का नुकसान मई के दौरान हुआ है, जबकि 39 करोड़ की चपत अप्रैल में लगी है।

और बढ़ेंगी दिक्कतें

हिमाचल में बागबान अभी भी चिंतित हैं। चूंकि विभाग ने गुरुवार को फिर ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की है, जबकि राज्य में 25 मई तक मौसम खराब रहेगा, जो किसानों-बागबानोें की दिक्कतें बढ़ा सकता है।

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