496 रुपए का मीटर… और ठेका 982 में

बिजली मीटर बदलने में घोटाले के आरोप; कर्मचारी बोले, निजी कंपनी को सौंपा काम

शिमला —राज्य बिजली बोर्ड प्रदेश में उपभोक्ताओं के बिजली मीटर बदलने का काम शुरू कर रहा है। बोर्ड के कर्मचारियों का अमूमन यही काम है कि वह उपभोक्ताओं के यहां पर बिजली का मीटर लगाएं, लेकिन अब बोर्ड ने यह काम ठेके पर दे दिया है। इतना ही नहीं, कम दरों पर मिलने वाला बिजली मीटर दोगुणा दामों पर बदलने का ठेका निजी कंपनियों को दिया गया है, जिसमें धांधलियों के आरोप  बोर्ड की कर्मचारी यूनियन ने लगाए हैं। इसके साथ पुराने मीटर, जिसका कोई इस्तेमाल नहीं हो सका वह भी ठेकेदारों को 300 रुपए प्रति मीटर के हिसाब से दिया जाएगा।  बिजली मीटरों को बदलने का काम बिजली कर्मचारियों से करवाने की बजाय निजी कंपनियों व ठेकेदारों से करवाने में तरजीह दी जा रही हैं। बिजली बोर्ड द्वारा मुख्यमंत्री व निवर्तमान बिजली मंत्री के गृह जिला मंडी में ही 25152 इलेक्ट्रो मेकेनिकल मीटरों को 982 रुपए प्रति मीटर के हिसाब से बदलने और बॉक्स में फिट करने का टेंडर जम्मू की पीर पंचाल फर्म को दिया गया है, जबकि मीटर की कीमत मात्र 496 रुपए है। यही प्रक्रिया पूरे प्रदेश में अपनाई जा रही है।  हमीरपुर जिला के नादौन मंडल में 840 रुपए और बड़सर मंडल में 815 रुपए प्रति मीटर बदलने का टेंडर किया गया है,  जबकि इन बड़ी कंपनियों द्वारा काम सबलेट करके मात्र 80 से 100 रुपए तक में मीटर बदलवाया जा रहा है। हैरानी की बात है कि जो पुराना इलेक्ट्रो मेकेनिकल मीटर उतार कर बिजली बोर्ड के स्टोर में जमा करवाना है, उसके बदले में 300 रुपए प्रति मीटर ठेकेदार को अदा करने का प्रावधान टेंडर में है।  पुराना बदला गया मीटर कबाड़़ में 10 रुपए तक ही बिक सकता है, लेकिन उसके भी 300 रुपए देने का प्रावधान बोर्ड ने किया है।

कर्मचारी यूनियन ने जांच को उठाई आवाज

बिजली बोर्ड की कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष कुलदीप सिंह खरवाड़ा ने कहा कि आज तक जो इलेक्ट्रो मेकेनिकल मीटर नहीं बदले गए हैं, उसकी बड़ी वजह बिजली बोर्ड द्वारा दो सालों तक मीटर उपलब्ध न करवाना रहा है।  उन्होंने यूनियन की ओर से बिजली बोर्ड में चल रहे इस घोटाले की जांच की मांग की है और बिजली मीटर लगाने और बदलने जैसे कार्यों को बिजली कर्मचारियों से करवाने की मांग रखी है। उनका कहना है कि जब पहले से बिजली बोर्ड के कर्मचारी इस काम को करते हैं, तो अब क्यों नहीं।

 

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