608 प्री नर्सरी स्कूलों में पहुंचीं किताबें

शिमला—राजधानी शिमला सहित जिला के अन्य प्री नर्सरी स्कूलों में नौनिहालों को रंग-बिरंगी किताबें पहुंचा दी गई हैं। एनसीआरटी से प्री नर्सरी की किताबें आने के बाद शिक्षा विभाग ने सबसे पहले जिला के स्कूलों में ही छात्रों को एनसीआरटी के सिलेबस की सुविधा दी है। खास बात यह है कि पहली बार चार साल के बच्चों के लिए स्कूलों में अलग सिलेबस होगा। वहीं, उसी सिलेबस के अनुसार छात्रों को पढ़ाने के बाद उनके टेस्ट भी लिए जाएंगे। प्री नर्सरी के छात्रों को एनसीआरटी दिल्ली की ओर से ही सिलेबस तैयार किया गया है। ऐसे में अब कहा जा सकता है कि प्री नर्सरी से लेकर जमा दो तक सरकारी स्कूलों के छात्र एनसीआरटी की ही किताबें पढ़ेंगे। जानकारी के अनुसार एनसीआरटी ने प्री नर्सरी के छात्रों के लिए जो सिलेबस तैयार किया है, उसमें छात्रों को कई ऐसी नई चीजें रंग रोगन के माध्यम से बताई जाएंगी, ताकि छोटी उम्र में ही नौनिहालों को सामाजिक पहलुओं के बारे में जानकारी मिल सके। बता दें कि शिमला जिला में 608 सरकारी स्कूलों में पिछले साल प्री नर्सरी की कक्षाएं शुरू की गई थीं। जानकारी के अनुसार इन सभी स्कूलों में एक हजार से भी ज्यादा छात्रों को एनसीआरटी की फ्री किताबों की सुविधा मिलेगी। स्कूलों में किताबें पहुंचाने के साथ ही शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को नए लर्निंग आउट से पढ़ाने के निर्देश जारी कर दिए हैं। एसएसए अब प्री प्राइमरी के छात्रों को किसी भी सुविधा से महरूम नहीं रखना चाहते। विभाग के अधिकारियों का मानना है कि अगर प्री प्राइमरी के छात्रों को सुविधाएं अच्दी मिलेंगी, तो सरकारी स्कूलों में छात्रों की इनरोलमेंट बढ़ाने में भी आसानी होगी। उल्लेखनीय है कि शिक्षा विभाग ने प्री प्राइमरी की कक्षाएं सरकारी स्कूल में तभी शुरू की थीं, क्योंकि हर साल सरकारी स्कूलों से स्कूल छात्र मुंह मोड़ रहे थे। निजी स्कूलों की तर्ज पर सरकारी स्कूलों में छात्रों को सुविधाएं देने के मकसद से चार साल तक के बच्चों को स्कूल में दाखिला करवाना शुरू किया था। बता दें कि विभाग की यह योजना एक साल में तो सफल हुई, लेकिन इस साल यह योजना सफल नहीं हो पाई। शिमला जिला में प्री प्राइमरी के दूसरे चरण में इक्का दुक्का अभिभावकों ने ही अपने नौनिहालों के दाखिले स्कूल में करवाए। ऐसे में अब देखना होगा कि प्री नर्सरी के छात्रों को अलग से किताबें मिलने के बाद छात्रों की इनरोलमेंट पर कितना फर्क पड़ता है।

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