70 करोड़ी वाटर प्रोजेक्ट तैयार

सतलुज के मुहाने पर बनी परियोजना से राजधानी को मिलेगा पानी, इसी माह हो जाएगी चालू

सुन्नी -शिमला ग्रामीण से सतलुज नदी के मुहाने पर राजधानी के लिए बन रही पेयजल योजना जहां बिल्कुल तैयार है तथा इसी माह लोगों को पेयजल आपूर्ति मिलनी शुरू हो जाएगी वहीं उक्त महत्वाकांक्षी योजना के साथ लगती कई पंचायतों में भारी पेयजल किल्लत के बावजूद क्षेत्रवासियों को उपरोक्त पेयजल योजना से एक बूंद भी नसीब नहीं होगी। एक ओर सरकार एवं विभाग में उत्साह है कि लगभग 70 करोड़ की लागत से बनने वाली यह योजना तय समयावधि से पहले ही जनता को समर्पित हो रही है दूसरी ओर सच्चाई यह है कि जिन स्थानीय लोगों के चरागाह एवं जंगलों का उपरोक्त योजना के निर्माण में नुकसान हुआ है उन्हें अभी भी पेयजल के लिए तरसना पड़ेगा। बता दें कि गत वर्ष शिमला में भारी पेयजल किल्लत को देखते हुए सरकार ने सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग के साथ शिमला ग्रामीण के सुन्नी से पेयजल योजना के निर्माण का खाका तैयार किया जिसके लिए विभाग ने सतलुज नदी पर ऐतिहासिक बिजली घर चाबा के अतिरिक्त पानी को इकट्ठा करके 10 एम एल डी पानी पानी राजधानी को आबंटित करने के लिए पेयजल योजना पर कार्य शुरू किया। गत वर्ष नवम्बर माह में चाबा के समीप विभाग ने पेयजल योजना पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया जिसका मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने 18 दिसंबर 2018 को शिलान्यास करके घोषणा की थी कि गर्मियों में पेयजल योजना को शुरू कर दिया जाएगा। विभागीय सूत्रों के अनुसार उपरोक्त योजना पर दिन रात कार्य करने का नतीजा है कि समय से पहले ही यह योजना जनता के लिए समर्पित हो जाएगी। ऐतिहासिक बिजली घर चाबा की टरबाइनों से निकलने वाले पानी को बूस्टर स्टेज के माध्यम से आगे कई टैंकों से गुजरते हुए 16 किमी पाईप लाइनों के द्वारा पानी गुम्मा के भंडारण टैंकों में पहुंचाया जाएगा जहां से यह पानी राजधानी के लोगों की प्यास बुझाने में मदद करेगा। जानकारी अनुसार गर्मियों में जब पेयजल की कमी हो जाती है उसे पूरा करने के लिए सतलुज नदी के ऐतिहासिक बिजली घर के दस एम एल डी पानी का इंतजाम किया गया है। यही नहीं सतलुज के पानी के अलावा बहाव पेयजल योजना को सम्मलित करने का प्रावधान भी विभाग द्वारा योजना में रखा गया है। बहरहाल पेयजल योजना में कई चरणों की होने वाली टैस्टिंग शुरू हो गई है। पेयजल योजना के आरंभ होने के लिए विद्युत आपूर्ति प्रदान कर दी गई है जिसे 72 घंटों पर चार्ज करने के बाद चरणबद्ध तरीके से पानी की टेस्टिंग शुरू हो जाएगी। जानकारी के अनुसार विभाग के कई आलाधिकारी समय-समय पर योजना के अवलोकन हेतु निर्माणाधीन स्थल पर लगातार दस्तक दे रहे है। योजना को विद्युत आपूर्ति मिलने के मौके पर भी विभाग के कई आलाधिकारियों ने उक्त योजना पर फीडबैक ली।

पेयजल योजना तो हैं पर काफी नहीं

शिमला के लिए बनने वाली 70 करोड़ की पेयजल योजना के साथ लगते सुन्नी, शकरोड़ी,  बसंतपुर, बलदेया एवं मझिवड़ के कुछ क्षेत्रों में अकसर पेयजल किल्लत रहती है। क्षेत्र में कई छोटी-छोटी योजनाएं तो है परंतु बढ़ती आबादी एवं उचित देखरेख के चलते पानी की उपलब्धता कम है। गत वर्ष बनाई गई 105 करोड़ की योजना भी सही ढंग से क्रियान्वित न होने के कारण लोगों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। वहीं नप सुन्नी में वर्षों पहले बनाई गई योजना से पेयजल किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। 21 करोड़ की योजना प्रस्तावित तो है परंतु उसमें बजट रोड़ा बना हुआ है।

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