अनदेखी ने जड़ा पुस्तकालय पर ताला

कांगड़ा—कांगड़ा शहर में वर्षांे पुराने पुस्तकालय को सुचारू रूप से चलाने की मांग शहर के बुद्धिजीवियांे ने उठाना आरंभ कर दिया है। शहर के बीचांेबीच नगर परिषद कांगड़ा के कार्यालय परिसर में स्थित इस लाइब्रेरी में बेहतर व्यवस्था करने की भी मांग शहरवासियांे द्वारा की जा रही है। इतना ही नहीं इस पुस्तकालय के बंद होने के पीछे नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लगाए जा रहे हैं। नगर परिषद कांगड़ा के पूर्व मनोनीत पार्षद सतपाल चौधरी का कहना है कि कांगड़ा शहर तथा पुराना कांगड़ा में नगर परिषद द्वारा दो पुस्तकालयांे का संचालन किया जाता था। उनका आरोप है कि नगर परिषद प्रशासन द्वारा इन पुस्तकालयांे की ओर ध्यान न दिए जाने के कारण मौजूदा समय में यह बंद पड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि जब सरकार द्वारा उन्हें नगर पार्षद नियुक्त किया गया था तो उस समय उन्होंने नगर परिषद परिसर में स्थित लाइब्रेरी को शुरु करने का प्रयास भी किया। उनका आरोप है कि नगर परिषद की कार्यालय परिसर में स्थित पार्किंग को मिली भगती से ऊंची पहुंच रखने वाले व्यक्ति को दिया गया जिस पर उनका पूरा क़ब्ज़ा हैं। उनका  आरोप है कि कांगड़ा की लाइब्रेरी को उक्त व्यक्ति ने अपनी मनमर्जी का अड्डा बना रखा है। उनका जब दिल करता है इसे तब खोलते हैं। उन्हांेने मांग की है कि इस लाइब्रेरी को नगर परिषद प्रशासन द्वारा संचालित किया जाना चाहिए, जिससे कि कांगड़ा शहर सहित आसपास के क्षेत्रांे के पुस्तकांे में रुचि रखने वाले लोगांे को इसका लाभ मिल सके। लाइब्रेरी में व्यवस्थाएं भी बेहतर की जाएं तो यहां लोगांे की रुचि भी बढ़ेगी। इस बारे नगर परिषद कांगड़ा की कार्यकारी अधिकारी कंचन बाला का कहना है कि लाइब्रेरी को विवेकानंद केंद्र कांगड़ा को एग्रीमेंट के तहत दिया गया है। साथ ही इस लाइब्रेरी को लोगांे के लिए खोला भी जाता है। इस मामले में विवेकानंद केंद्र कांगड़ा के संचालक अग्निहोत्री का कहना है की उक्त लाइब्रेरी पर किसी व्यक्ति विशेष का कब्जा नहीं है। लाइब्रेरी को शाम दो घंटे के लिए खोला जाता हैं ओर अगर उसके बाद भी किसी को लाइब्रेरी में बैठना हो तो जब मर्जी नगर परिषद से चाबी ले सकता है। इसके अलावा यदि लाइब्रेरी के संबंध में किसी प्रकार की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, तो उनको भी मामले की जानकारी दे सकते हैं,  जिससे कि इस लाइब्रेरी का संचालन और बेहतर किया जा सके।

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