अनिल शर्मा के सियासी करियर पर लगा कर्फ्यू

शिमला – पूर्व मंत्री अनिल शर्मा के राजनीतिक करियर पर पूरी तरह कर्फ्यू लग चुका है। हालांकि वह अभी तक भाजपा विधायक हैं, लेकिन लोकसभा चुनाव के दौरान उनके पिता और पुत्र के राजनीतिक ड्रामे ने अनिल शर्मा के राजनीतिक करियर पर पानी फेर दिया। अनिल शर्मा के पिता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री पंडित सुखराम ने पोते आश्रय शर्मा को कांग्रेस से चुनाव लड़वाने का राजनीतिक ड्रामा रख दिया और लाखों मतों से हार देखने को मिली, जिसका सीधा असर अनिल शर्मा की राजनीति पर पड़ चुका है। पिछले दिनों मंडी में अनिल शर्मा राजनीतिक पारी के बहाने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का स्वागत भी कर गए, लेकिन मंच पर उन्हें भाजपा ने पूरी तरह इग्नोर कर दिया। यहीं से साबित हो गया कि अब अनिल शर्मा के लिए भाजपा में कोई जगह नहीं हैं। दूसरी तरफ अनिल शर्मा चाह कर भी कांग्रेस में शामिल नहीं हो सकते। कारण यह है कि यदि भाजपा छोड़ कांग्रेस से हाथ मिला लेते हैं, तो उनकी विधायकी भी चली जाएगी। भाजपा भी उन्हें पार्टी से निष्कासित करने की तैयारी कर चुकी है। राजनीतिक कर्फ्यू के साथ-साथ जयराम कैबिनेट में मात्र 15 महीने का मेहमान बनकर इस्तीफा दे चुके पूर्व मंत्री अनिल शर्मा पर अब भाजपा चार्जशीट की तलवार लटक सकती है। हालांकि पूर्व में विपक्ष में रहते भाजपा ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार के खिलाफ  चार्जशीट तैयार की थी, लेकिन 2017 के चुनाव में अनिल शर्मा भाजपा में शामिल हुए, तो वर्तमान भाजपा सरकार ने उनके आरोपों को विजिलेंस से भी दूर रखा। इस बार के लोकसभा चुनावों में उन्होंने अपने बेटे की राजनीति के लिए मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। सूत्रों के मुताबिक प्रदेश सरकार अनिल शर्मा पर लगे आरोपों की फाइल खोलने के लिए विजिलेंस को आदेश दे सकती है। पूर्व की वीरभद्र सरकार में अनिल शर्मा पंचायतीराज एवं ग्रामीण विकास मंत्री के पद पर थे, तो भाजपा चार्जशीट में अनियमितताओं के आरोप लगे थे।

20 जून की बैठक में होगा फैसला

पूर्व मंत्री अनिल शर्मा के खिलाफ प्रदेश भाजपा कार्रवाई करने की तैयारी में हैं। भाजपा कोर कमेटी की 20 जून को शिमला में होने वाली अहम बैठक में अनिल शर्मा मसले पर फैसला हो सकता है। हालांकि इस बैठक में आगामी रणनीति तैयार की जाएगी, लेकिन अनिल शर्मा को पार्टी से बाहर करने या न करने बारे अहम फैसला भी होना है।

15 महीने तक बंद पड़ी थी फाइल

हालांकि 15 महीने से अनिल शर्मा पर लगे आरोप पूरी तरह बंद हो गए थे, लेकिन वर्तमान की राजनीतिक परिस्थितियां देखते हुए चुनावी नतीजे के साथ ही जांच खुल सकती है। प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के नाते विजिलेंस ने भी अनिल शर्मा पर लगे आरोपों की जांच के लिए गृह विभाग से मंजूरी नहीं मांगी। अब अनिल शर्मा न तो सरकार में मंत्री हैं और न ही भाजपा के साथ हैं। ऐसी स्थिति में प्रदेश सरकार की जांच एजेंसी विजिलेंस कभी भी पुरानी फाइल खोल सकती है। भाजपा चार्जशीट में अनिल शर्मा पर पशुपालन विभाग और पंचायतीराज एवं ग्रामीण विकास विभाग में अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। भाजपा चार्जशीट में आरोप लगे हैं कि अनिल शर्मा ने 2012 के विधानसभा चुनाव के दौरान आय व संपत्ति के हलफनामे में मंडी स्थित होटल, जो पांच साल बंद रहा तथा सूरत में 1970 में लगाए सेब के बागीचे, जिसमें सेब के पेड़ सूख चुके हैं, से करोड़ों रुपए की आमदनी कैसे दर्शाई गई। इस तरह के आरोप भाजपा चार्जशीट में लगे हैं।

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