अब दिल्ली में छेड़ेंगे ट्रेकिंग मुहिम

कुल्लू –कुल्लू के पहाड़ों की बिना गाइड सैर करनी आपके के लिए जोखिम भरी होगी। पहाड़ों की सैर कहीं जिंदगी के सफर को कुछ पल में विराम न लग जाए। इन्सान की नालायकी और लापरवाही कई बार भारी पड़ती है, जो हमारे साथ भी घटने वाला था। लेकिन भगवान और मोबाइल फोन ने नई जिंदगी प्रदान की है। यह कठिन परिस्थतियों वाली दास्तां जिला कुल्लू के जोखिम भरे चंद्रखणी ट्रैक रूट में लगभग चार दिनों फंसे दिल्ली की ट्रैकर अदयाशा मिश्र और पश्चिमी बंगाल के ट्रैकर काबोल मुखर्जी ने रेस्क्यू दल को सुनाई। अब यह दोनों सैलानी राजधानी दिल्ली में ट्रैकिंग के बारे में जागरूक करेंगे। वहीं, यह भी अपील करेंगे की कुल्लू-मनाली पहुंच ट्रैकिंग रूट जाने से पहले पुलिस और ट्रैकिंग एजेंसियों से संपर्क साधे, ताकि टूअर में वादा न पहुंच जाए।  वहीं, इन दोनों ट्रैकरों ने देश-दुनिया के युवा ट्रैकरों के साथ-साथ अन्य सैलानियों से अपील की है कि वह विद आउट गाइड पहाड़ों की ओर न जाएं। वादियां तो यहां की सचमुच बेहद खूब-सूरत हैं, लेकिन अकेले इनकी तरफ जाना जान गवां सकता है।  दोनों युवा ट्रैकरों ने लोगों से अपील की है कि अगर यहां के ट्रैक रूटों को निहारने का प्लान बना है तो वह यहां पहुंच पहले पुलिस की सलाह जरूर लें। वहीं, पंजीकृत गाइडों को पहाड़ों की सैर के लिए ढूंढना जरूर है। दिल्ली के इन सैलानियों ने बाकायदा एक वीडियो क्लीप भेज कर पहला संदेश दिया है कि पहाड़ों की ट्रैकिंग के लिए गाइड का होना जरूरी है। वहीं, दूसरा संदेश यह है कि पंजीकृत गाइड ही ट्रैकरों को अच्छी ट्रैकिंग करवा सकता है। चंद्रखणी के साथ लगती फूटासौर की पहाड़ी में दिल्ली की अदयाशा मिश्र और काबोल मुखर्जी ने तीन रातें पेड़ों को नीचे गुजारी। वहीं, दिल्ली में लोगों से यह अपील करेंगे कि कुल्लू-मनाली में जाकर गाइडों को साथ लेकर ट्रैकिंग करें। पुलिस और नेगीज रेस्क्यू दल उन्हें नई जिंदगी प्रदान करने में सहायता प्रदान की है।

 

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