अब पायलट बनना और आसान

सरकार ने सरल किए लाइसेंस हासिल करने के नियम, पांच साल में 200 घंटे की उड़ान के अनुभव का नियम खत्म

नई दिल्ली -देश में कमर्शियल पायलटों की कमी को देखते हुए सरकार ने पायलट लाइसेंस हासिल करने के नियम आसान कर दिए हैं। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने पायलट लाइसेंस के लिए उड़ान-अनुभव की शर्तों में ढील देते हुए अब उन पायलटों को भी लाइसेंस देने का फैसला किया है, जिनका पिछले पांच साल में उड़ान भरने का कोई अनुभव न रहा हो। पहले आवेदन करने की तिथि से पिछले पांच साल में कम से कम 200 घंटे की उड़ान का अनुभव अनिवार्य था। मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी कर ‘एयरक्राफ्ट रूल्स, 1937’ में संशोधन कर दिया है। अब प्रशिक्षण और उड़ान अनुभव हासिल करने के कितने भी समय बाद पायलट लाइसेंस के लिए आवेदन किया जा सकेगा। साथ ही करियर के बीच में अंतराल आने से भी दोबारा लाइसेंस हासिल करने में पायलट को कोई दिक्कत नहीं होगी। उल्लेखनीय है कि देश में हवाई यात्रियों की संख्या पिछले चार साल में 20 प्रतिशत सालाना की दर से बढ़ी है। इसे देखते हुये विमान सेवा कंपनियों ने बड़ी संख्या में विमानों के ऑर्डर दिए हुए हैं। इनके लिए प्रशिक्षत मानव संसाधन की कमी एक बड़ी चुनौती है। सरकार ने इसी के मद्देनजर पायलट लाइसेंस हासिल करने के नियम आसान किए हैं।

एटीसी को 31 दिसंबर तक लेना होगा लाइसेंस

हवाई यातायात नियंत्रक (एटीसी) अधिकारियों के लिए पहली बार लाइसेंस की व्यवस्था करने के बार सरकार ने सभी मौजूदा एटीसी अधिकारियों के लिए लाइसेंस हासिल करने के लिए 31 दिसंबर, 2019 तक का समय तय किया है। नागरिक उड्डयन क्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के दबाव में भारत ने करीब छह महीने पहले विदेशों की तर्ज पर भारतीय एटीसी नियंत्रकों के लिए भी लाइसेंस की व्यवस्था शुरू करने का फैसला किया था। अब तक एटीसी अधिकारियों की भर्ती भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण द्वारा की जाती है और प्रवेश परीक्षा तथा गहन प्रशिक्षण के बाद उन्हें यह जिम्मेदारी दी जाती है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एक अधिसूचना में बताया कि जो एटीसी अधिकारी 05 नवंबर, 2018 से पहले हवाई यातायात नियंत्रक की जिम्मेदारी निभा रहे थे वे ‘लाइसेंस हासिल करने तक या 31 दिसंबर, 2019 तक’ काम करना जारी रख सकते हैं।

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