अब प्रदूषण मुक्त होगी स्वां

गगरेट -जो लोग महज यह सोचते हैं कि मोक्षदायिनी मां गंगा ही इस देश की सबसे प्रदूषित नदी है, हो सकता है वह गलफत में हों। जिला ऊना की जीवन धारा कही जाने वाली सोमभद्रा यानी स्वां नदी भी प्रदूषण के लिहाज से रिकार्ड तोड़ रही है। मानवीय भूल के चलते इस नदी को डंपिंग साइट बनाने में किसी ने कसर नहीं छोड़ी और हवन यज्ञ कर पुण्य के भागी बन रहे कुछ लोग भी इसी पवित्र नदी को प्रदूषित करने का पाप जाने-अनजाने में अभी भी कर रहे हैं। यही कारण है कि इस नदी से अब जल में पनपने वाले जीव पूर्णतया गायब हो गए हैं। हालांकि ल्यूमिनस उद्योग ने अपने सामाजिक सरोकारों का निर्वहन करते हुए अब इस नदी को प्रदूषण मुक्त करने का बीड़ा उठाया है और पर्यावरण पखवाड़े के साथ इस उद्योग के प्रशासनिक अधिकारियों व कर्मचारियों ने नदी में उतर कर इसमें गिराया गया कई क्विंटल कचरा एकत्रित कर इस नदी का पुराना स्वरूप लौटाने का प्रयास किया। सोम यानी अमृत और भद्रा मतलब नदी। पौराणिक ग्रंथों में भी इस नदी का वर्णन अमृत की नदी के रूप में किया गया है। इस जमाने में जल स्रोत सीमित थे उस जमाने में इस नदी के आस-पास बसे गांवों के लोग अपनी घरेलू जरूरतें पूरी करने के लिए इसी नदी के जल का प्रयोग करते थे। कई त्योहारों पर इस नदी के पवित्र जल में स्नान करने की परंपरा थी, लेकिन वक्त बदलने के साथ इस नदी का स्वरूप भी बदल गया। यह पवित्र नदी गंदे नाले में तबदील होने लगी। इस नदी के किनारे बसे कई उद्योगों ने उद्योग से निकलने वाला गंदा पानी बिना उपचारित किए ही इस नदी में उढ़ेलना आसान उपाय सोचा तो भगवान में आस्था रखने वालों ने भी पूजा-पाठ के बाद बचने वाली सामग्री को इस नदी में इस कद्र प्रवाहित किया कि कई स्थानों पर तो यह पोलिथीन की नदी नजर आने लगी। वहीं, मंगलवार को ल्यूमिनस उद्योग के अधिकारी व कर्मचारी इस नदी की साफ-सफाई कर सुखद अनुभूति करवा रहे थे।  उधर, ल्यूमिनस उद्योग के उप महाप्रबंधक अजय भारद्वाज, प्रबंधक राजिंद्र कुमार, गोविंद राम ने कहा कि ल्यूमिनस उद्योग से अशुद्ध पानी की एक बूंद तक स्वां नदी में नहीं जाने दी जाती और यह नदी फिर से अपने पुराने स्वरूप में आ सके इसके लिए प्रयास जारी रहेंगे।

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