अभी दुनिया देखी नहीं…लग गया दिल का रोग

शिमला –अभी दुनिया देखी भी नहीं और दिल का रोग लग गया। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत यह बड़ा खुलासा हुआ है, जिसमें सामने आया है कि वर्ष 2018 से मार्च 2019 तक जांचे गए बच्चों में से प्रदेश भर से 240 प्रभावित बच्चों को आईजीमएसी भेजा गया था, जिसमें सरकारी, निजी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र और आंगनबाड़ी के बच्चों की स्वास्थ्य जांच की गई है। इमसें हैरान कर देने वाले आंकड़े ये समने आए हैं कि इन 240 बच्चों में से 130 को दिल की बीमार जन्मजात ही निकली है। बाकी अन्य रोगों पर गौर करें तो बहरापन, जन्म से मोतिया, जन्म से दृष्टिहीन बच्चों और मेडिसिन के बच्चों को   आईजीएमसी  रैफर किया गया था। गौर हो कि इस हैल्थ प्रोग्राम के तहत जिन बच्चों को आईजीएमसी रैफर किया गया है, उनकी बीमारी की गंभीर अवस्था को लेकर प्रदेश के सबसे बडे़ मेडिकल कालेज में बच्चों का इलाज किया गया। हालांकि जन्मजात दिल के रोग के रिकार्ड देखते हुए प्रदेश स्वास्थ्य विभाग को भी गंभीरता जाहिर करनी होगी। रिकार्ड देखते हुए सामने आया है कि इसमें निम्न और मध्यम वर्गीय तबका प्रभावित बच्चों में से सबसे ज्यादा है। गौर हो कि कार्डियोलॉजी विभाग में भी जन्मजात दिल के रोगी बच्चों को लेकर आईजीमएसी में एक सेमिनार का आयोजन किया गया है। बच्चों के दिल के रोगों को लेकर आईजीएसमी यह भी कोशिश कर रहा है कि वह प्रदेश सरकार को जन्मजात बच्चों को लेकर एक स्टडी करने का प्रस्ताव भी सौंपने वाला है।

240 बच्चों के इलाज के लिए सवा 75 लाख रुपए की मदद

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत आईजीएमसी में 240 बच्चों के इलाज के लिए 75 लाख 22 हजार का सहायता दी गई है। एनएचएम के तहत प्रदेश सरकार की ओर से बच्चों के  इलाज में यह मदद की गई है, जिसमें सबसे ज्यादा दिल के  रोग पर बच्चों का ऑपरेशन किया गया है। आईजीएमसी एमएस डा. जनक राज का कहना है कि प्रदेश सरकार के  तहत 240 बच्चोंे को जीवनदान दिया गया है।

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