असंवेदनशील बना रही वीडियो गेम

एक्सपर्ट्स का मानना है कि स्मार्टफोन पर ज्यादा वक्त बिताने से बच्चों में एंग्जाइटी, डिप्रेशन और अटैचमेंट डिसऑर्डर के साथ एडीडी और साइकॉसिस जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। मोबाइल पर खतरनाक वीडियो गेम बच्चों को असंवेदनशील बना रही हैं। स्क्रीन पर ज्यादा वक्त गुजारने पर वे लोगों की भावनाओं से रू-ब-रू नहीं हो पाते, तो उनमें इम्पथी की कमी हो जाती है। स्मार्टफोन पर वीडियो गेम खेलने वाले बच्चों को लगने लगता है कि हिंसात्मक रवैया अपनाकर वे आसानी से किसी भी समस्या का समाधान कर सकते हैं। मनोचिकित्सकों की मानें तो बच्चे को जब गेम की लत लग जाती है, उसे मेडिकल की भाषा में ऑब्सेशन कहते हैं। पेरेंट्स जब बच्चे को रोकने की कोशिश करते हैं तो वह चाह कर भी नहीं रूक पाता। बचपन में प्यार ज्यादा मिले तो बच्चे को कंडक्ट डिसऑर्डर का खतरा हो जाता है। अगर उसका इलाज न हो तो वह कंडक्ट एंटी-सोशल पर्सनेलिटी बन जाता है।

 

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