आढ़तियों के लिए 50 लाख लाइसेंस फीस

बागबानी से जुड़े कानून में संशोधन करेगी सरकार, प्रदेश के बागबानों को ठगी से बचाने की योजना

शिमला – हिमाचल प्रदेश सरकार बागबानों के साथ लूट मचाने वाले आढ़तियों पर शिकंजा कसने जा रही है। इन पर लाइसेंस फीस की मार पड़ेगी, ताकि ये लोग बागबानों के साथ धोखाधड़ी नकर सकें। बताया जा रहा है कि इनके लिए 50 लाख रुपए तक ही लाइसेंस फीस होगी। गौर हो कि हर साल बागबानों से धोखाधड़ी के ऐसे मामले सामने आते हैं, वहीं कइयों के खिलाफ पुलिस में भी मामले दर्ज किए गए हैं। ऐसे में अब सरकार सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। सरकार जल्द ही बागबानी एवं वानिकी उपज विपणन कानून में संशोधन करेगी। इसको लेकर पिछले सप्ताह कृषि मंत्री डा. रामलाल मार्कंडेय ने विधि विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक भी की। बैठक में इस पूरे मसले पर विस्तृत चर्चा की गई, जिसके बाद अधिकारियों ने अपना काम शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि आढ़त के लाइसेंस जारी करने से पहले पूरे दस्तावेज लिए जाएंगे। इसके साथ 50 लाख रुपए लाइसेंस फीस होगी। जो यह फीस देगा, उसे ही लाइसेंस हासिल हो सकेगा। यह राशि आढ़ती की गारंटी के रूप में रहेगी, जिसे सिक्योरिटी मनी भी कहा जा सकता है। यदि कोई आढ़ती किसानों और बागबानों से उनके उत्पाद खरीदने के बाद इसकी पेमेंट समय पर नहीं करता है, तो एपीएमसी किसानों, बागबानों को उस सिक्योरिटी राशि में से उनकी पेमेंट का भुगतान करेगी। यदि पेमेंट ज्यादा होती है तो उसके लिए कानूनी प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी। बताया जाता है कि एपीएमसी के पास 2013 से 2018 तक बागबानों की पेमेंट न करने की 200 के करीब शिकायतें पहुंची हैं। एपीएमसी ने इसमें से कुछ मामले सेटल करवा दिए हैं, वहीं 187 मामले जांच के लिए पुलिस को भेजे हैं। इसमें 5.38 करोड़ की राशि बागबानों को दी जानी है। एसआईटी इन मामलों की जांच कर रही है। पुलिस में हुई शिकायतों के अनुसार आढ़ती व लदानी किसानों-बागबानों के करोड़ों रुपए डकारने के बाद भूमिगत हो गए हैं या उनकी पेमेंट देने में आनाकानी कर रहे हैं। पुलिस थानों में आढ़तियों व लदानियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

2016 में कांग्रेस सरकार ने भी बदले थे नियम

पूर्व कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2016 में भी इस तरह का प्रयोग किया था। तत्कालीन सरकार ने नियमों में संशोधन किया और आढ़त की लाइसेंस फीस 25 लाख तय की। सरकार के इस नियम को आढ़तियों ने प्रदेश उच्च न्यायालय में चुनौती दी। कोर्ट में तर्क दिया गया कि यदि कोई आढ़ती 25 लाख एपीएमसी को सिक्योरिटी देता है तो कारोबारी फल एवं सब्जियां कैसे खरीदेगा। उच्च न्यायालय ने सरकार को निर्देश दिए कि आढ़तियों के टर्न ओवर के हिसाब से लाइसेंस फीस तय की जाए, लेकिन इसको लेकर अभी तक नियम ही नहीं बन पाया है। अब कृषि मंत्री डा. राम लाल मार्कंडेय इस मसले पर फुलप्रूफ काम करने की बात कहते हैं।

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