आधा फीसदी घटेंगी ब्याज दरें

नई दिल्ली – आर्थिक गतिविधियों में आई सुस्ती और वर्ष 2018-19 की अंतिम तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर के गिरकर 5.8 प्रतिशत पर पहुंचने के मद्देनजर भारतीय रिजर्व बैंक तंत्र में तरलता बढ़ाने के उद्देश्य से नीतिगत दरों में आधी फीसदी तक कटौती कर सकता है। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय बैठक के बाद गुरुवार को चालू वित्त वर्ष की मौद्रिक नीति की दूसरी द्विमासिक समीक्षा रिपोर्ट जारी की जाएगी, जिसमें नीतिगत दरों में कम से कम एक चौथाई फीसदी की कटौती किए जाने की उम्मीद की जा रही है। रिजर्व बैंक की नीतियों से महंगाई को लक्षित दायरे में सफलता मिली है, लेकिन आर्थिक गतिविधियों में तेजी लाने के उद्देश्य से उद्योग को सस्ता ऋण नहीं मिल पाया है जिससे निजी निवेश में तेजी नहीं आ पा रही है। फिक्की, सीआईआई और एसोचैम जैसे उद्योग संगठन भी पूंजी लागत में कमी लाने की आवश्यकता बता चुके हैं और ब्याज दरों में कटौती किए जाने की अपील करते रहे हैं। इस वर्ष मार्च में समाप्त तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर के गिरकर 5.8 प्रतिशत पर आने वर्ष 2018-19 का विकास दर 6.8 प्रतिशत रह गई। अब नई सरकार और रिजर्व बैंक दोनों पर आर्थिक गतिविधियों में तेजी लाने का भारी दबाव है। इसके मद्देजनर यह उम्मीद की जा रही है कि रिजर्व बैंक पिछली बार की तरह इस समीक्षा बैठक में भी नीतिगत दरों में कम से कम एक चौथाई फीसदी तक की कमी करेगा।

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