आम आदमी को चूसने का मजा

रामविलास जांगिड़

स्वतंत्र लेखक

गर्मी का मौसम हो, पारा 50 के पार हो, तो आम आदमी और आम दोनों ही बिलकुल एक तरह के हो जाते हैं। लिजलिजे, पिलपिले और बेहाल। आम ठेले पर पड़ा बिलबिलाता है और आम आदमी किसी झोंपड़े में कराहता है। गर्मियों में आम और वर्ष भर चूसा जाता है आम आदमी। ऐसी अवस्था में आम और आम आदमी दोनों को ही निचोड़ना तथा चूसना बड़ा ही फायदेमंद साबित हुआ है। आम आदमी को खास आदमी चूसता रहता है। अमूमन सभी राजनीतिक पार्टियां आम आदमी को बेहतर ढंग से चूसती हैं। एक पार्टीबाज दूसरे नए दल-बदल मुर्गे को ज्ञान बांट रहा है – हाथ में एक आम आदमी ले लीजिए और उसको आहिस्ता से धीरे-धीरे चारों ओर गोल-गोल घुमाते हुए उसे दबाते रहिए। उसको कसकर पकड़ लें। वादों व जुमलों की अंगुलियों से सहलाएं। आश्वासनों के बवंडर में लगातार घुमाते चले जाएं। ऐसा करने से आम आदमी एक खास ढंग से लिजलिजा हो जाएगा। फिर उसे चूसने में आपको बहुत मजा आएगा। इस कवायद में यह ध्यान रहे कि अगर आपने आम आदमी को किसी एक ही तरह से जोरदार तरीके से दबा दिया, तो वह कहीं से भी फट सकता है और फूट सकता है। उसके फटने-फूटने से जो भीतर से उसका गुब्बार है, वह उछल निकलेगा। वह आपके तमाम कपड़ों और चरित्र पर छपाक से हमला कर देगा। पार्टीबाज आम आदमी चूसते हुए बता रहा है- सावधानी रखें और आम आदमी को किसी एक ही तरफ से न दबाएं। बढि़या बात है कि इसको चारों तरफ से दबाते रहें। दबाते ही रहें और फिर इत्मीनान से उसमें एक जगह छेद कर दीजिए। इस छेद में से वह रिसता रहेगा, पिसता रहेगा, सिसकता रहेगा। फिर इसके चूसने के मजे लीजिए। जब आम आदमी की पीठ व पेट एक हो जाएं, तो फिर इसकी गुठली को निकालिए। इसे पार्टी की किसी छत पर उछाल दीजिए। जब कड़क धूप में इस आम आदमी की गुठली पड़ी रहेगी, तो फिर आप इसकी गुठली को फोड़कर उसके गूदे को निकाल सकते हैं। अब इसे भावनाओं की धीमी आंच पर स्वार्थ की कढ़ाई में पका लीजिए। इसमें जरा सी मीठी-रसीली बातों की चीनी मिला दीजिए। जब आम आदमी की गुठली भुरभुरी सी चूरी हो जाए, तो फिर आराम से उसे किसी चमचे की मदद से खाइए। आपके आसपास इतने ढेर सारे चमचे हैं, उन चमचों की मदद से आप किसी भी प्रकार का उपचमचा उठा लीजिए। फिर मजे से इस गुठली चूर्ण को फांकते रहिए। यही   पार्टी का धर्म, कर्म, कार्य और मोक्ष है। पोस्ट इलेक्शन का यही मर्म है। सामने देखिए ताजा आम व आम आदमियों की पेटियां अभी मार्केट के रोड शो में आई हैं। आम आदमी और आम का चूसना निरंतर जारी रखिए।

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