‘आयुष्मान भारत’ पर खुफिया तंत्र की नजर

हमीरपुर—‘आयुष्मान भारत’ योजना में सरकारी अस्पतालों की आईडी से अनधिकृत ढंग से हैल्थ कार्ड बनाने वालों पर खुफिया तंत्र की नजर पड़ गई है। खुफिया एजेंसी ने मामले में अपनी जांच तेज कर दी है। माना जा रहा है कि जांच करने के बाद रिपोर्ट हैल्थ डिपार्टमेंट को सौंपी गई है। जांच एजेंसी की रिपोर्ट में स्वास्थ्य विभाग को मामले की निष्पक्ष जांच के लिए कहा गया है। संभव है कि जांच एजेंसी ने मामले में कुछ लोगों के नाम भी स्वास्थ्य विभाग को सुझाए हैं। स्वास्थ्य विभाग मामले पर जांच बिठाएगा। फिलहाल सबसे महत्त्वकांक्षी स्वास्थ्य लाभदायी योजना के तहत हैल्थ कार्ड बनाने में बरती जा रही अनियमितताओं का पता चलने के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट हो गया है। वहीं खुफिया जांच एजेंसियां भी मामले में अपनी नजर बनाए हुए हैं। मामले की निष्पक्ष जांच के बाद क्लीयर हो जाएगा कि गैर कानूनी ढंग से किसने हैल्थ कार्ड बनाए हैं। अनधिकृत ढंग से आयुष्मान भारत व हिमकेयर के कार्ड बनाने वालों के हाथ पांव फूल गए हैं। नियमों को दरकिनार कर हैल्थ कार्ड बनाने वालों पर जांच की गाज गिरना तय है। बता दें कि ‘दिव्य हिमाचल’ ने यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया है। सूत्रों के अनुसार कार्ड बनाने के लिए अधिकृत सरकारी अस्पतालों की आईडी से पंचायतों में गैर कानूनी ढंग से आयुष्मान भारत व हिम केयर के कार्ड बनाए गए हैं। यही नहीं अनधिकृत तरीके से कार्ड बनाने वाले इन लोगों पर पंचायतों का भी कोई चैक नहीं। अनधिकृत लोग पंचायत में कहीं भी जाकर प्रति कार्ड बनाने के मनमाने दाम ले रहे हैं। हैरानी की बात है कि स्वास्थ्य विभाग को इसकी कानोंकान खबर तक नहीं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने माना है कि अस्पताल की आईडी व पासवर्ड अस्पताल को छोड़कर कहीं पर भी इस्तेमाल नहीं हो सकता। अगर ऐसा हो रहा है, तो ये गैर-काूननी है। आयुष्मान भारत व हिमकेयर के कार्ड अधिकृत सरकारी अस्पतालों में बनाए जा सकते हैं। इनके अलावा कॉमन सर्विस सेंटर इसके लिए नामित  हैं। इनके अलावा कोई अन्य हैल्थ कार्ड्स को नहीं बना सकता। बिना किसी अनुमति के कुछ लोगों ने कैसे हैल्थ कार्ड बनवा दिए, यह मामला तूल पकड़ रहा है। सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) लोकेटर पर भी इनके नाम सीएससी सेंटर होने का प्रमाण नहीं है। ऐसे में मामला संगीन होता जा रहा है। फिलहाल मामले की जांच में जुटी जांच एजेंसियों ने जांच के लिए रिपोर्ट हैल्थ डिपार्टमेंट के सुपुर्द की है। मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ हो पाएगी।

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