आलू की बीमारी का उपचार शुरू

शिमला – हिमाचल में किसानों को 2024 तक आलू का बीज उपलब्ध नहीं हो पाएगा। प्रदेश में आलू के बीज पर केंद्र सरकार ने प्रतिबंध लगा रखा है। यह प्रतिबंध केंद्रीय एजेंसियों के सर्वे में सूत्र कृमि (निमोटोड) वायरस की पुष्टि के बाद लगा था। ऐसे में अब सीपीआरआई ने वायरस को खत्म करने के लिए अनुसंधान कार्य शुरू कर दिया है। सीपीआरआई के विशेषज्ञ वैज्ञानिकों का दावा है कि इस वायरस को पूरी तरह से खत्म करने में करीब चार से पांच साल तक का समय लग सकता है। ऐसे में हिमाचल में आलू उत्पादकों को बीज प्राप्त करने के लिए बाहरी राज्यों के चक्कर काटने पड़ सकते हैं। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर व तमिलनाड़ू में उत्पादित होने वाले आलू के बीज पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद सीपीआरआई के विशेषज्ञों ने कुफरी व फागू स्थित अपने फार्म हाउसिज में वायरस को खत्म करने के लिए कार्य आरंभ कर दिया है। इसके लिए वैज्ञानिक तकनीक के साथ-साथ परंपरागत तरीके भी अपनाए जा रहे हैं। सीपीआरआई ने साफ कर दिया है कि आगामी चार-पांच वर्षों तक इन फार्मों में आलू का बीज उगाया जाएगा। बता दें कि सीपीआरआई कुफरी व फागू में आलू का 800 क्ंिवटल बीज तैयार करता है। इसमें से 250 से 300 क्ंिवटल बीज व राज्य सरकार को सप्लाई करता है। वहीं सीपीआरआई शेष बीज को बाहरी राज्य मिजोरम, मेघालय को सप्लाई करती है। सीपीआरआई विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों के मद्देनजर यहां के लिए जालंधर में तैयार होने वाला आलू का बीज अनुकूल है। इतना ही नहीं, सीपीआरआई के विशेषज्ञ इसे लेकर राज्य सरकार को भी अपने सुझाव भेज चुके हैं।

हिमाचल में घटेगा उत्पादन

केंद्रीय एजेंसियों के सर्वे में सामने आए वायरस के बाद प्रदेश में अब आलू का उत्पादन काफी गिर जाएगा। सीपीआरआई ही राज्य सरकार को आलू का बीज सप्लाई करता है, जिसे सरकार किसानों को सबसिडी पर मुहैया करवाती है। इस बार बीज उपलब्ध न होने की वजह से हिमाचल में बीते वर्षों के मुकाबले आलू उत्पादन में काफी गिरावट आ सकती है।

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