इस बरसात भी बच्चों की जान आफत में डालेगी सरकार

नहीं बदला गया छुट्टियों का शेड्यूल

पिछले साल भी मानसून में बिगड़े थे हालात, तब तो सितंबर तक चली थी झमाझम

किसके दबाव में नहीं हुआ बदलाव, कटघरे में शिक्षा विभाग-मंत्री

 शिमला —स्कूल जाते मासूमों की जान जाए या बचे, सरकार को कोई लेना-देना नहीं, क्योंकि उसे तो सिर्फ और सिर्फ परंपराओं का निर्वहन जो करना है। और परंपरा भी वह जो दो-चार साल पहले बिना सोचे-समझे शुरू हुई। दशकों से हिमाचल के स्कूलों में बरसात को डेढ़-दो माह अवकाश रहता आया, ताकि भारी बारिश में मासूमों की जान को कोई खतरा न हो। राजधानी में बैठे कुछ नेताओं और अफसरों को पता नहीं क्या दिखाई दिया कि जून से ही अवकाश देकर भर बरसात में पाठशालाएं शुरू करवा दीं। इस निर्णय से नुकसान भी हुआ। जान का भी और संपत्ति का भी, पर लापरवाह नीति निर्धारकों पर कोई असर नहीं पड़ा। पिछले साल से ग्रीष्मकालीन स्कूलों में वेकेशन का शेड्यूल बदलने की बड़ी मांग पर इस वर्ष भी कुछ नहीं हो पाया। पिछले साल बरसात सितंबर तक चली और उस दौरान स्कूली बच्चों के साथ कई तरह के हादसे भी हुए, इसलिए छुट्टियों का शेड्यूल तुरंत बदलने की मांग उठाई गई थी। नालागढ़ में बरसात के पानी में एक बच्चा बह गया था, वहीं ऊना, कांगड़ा, हमीरपुर आदि जिलों में भी इस दौरान कई हादसे हुए, जिसके बाद सरकार ने अभिभावकों की मांग पर कहा था कि छुट्टियों का शेड्यूल बदल दिया जाएगा। आखिर अपनी बात पर सरकार अडिग क्यों नहीं रह सकी, किसके दबाव में सरकार ने इस साल भी ग्रीष्मकालीन स्कूलों में अवकाश का शेड्यूल नहीं बदला, यह बड़ा और अहम सवाल है। इस मामले में सरकार के शिक्षा मंत्री और शिक्षा विभाग कटघरे में हैं। सोमवार को ग्रीष्मकालीन स्कूलों का वेकेशन शेड्यूल जारी हो गया, जिसके मुताबिक 26 जून से स्कूलों में छुट्टियां हैं, जो कि दो अगस्त तक चलेंगी। इसमें जानने योग्य बात यह है कि पिछले साल सितंबर तक बरसात चली और 15 जुलाई के बाद प्रदेश में भयंकर बारिश की शुरुआत हुई थी। मौसम विभाग के अनुसार इस बार भी बरसात लंबी चल सकती है, लेकिन उसके दावों को दरकिनार करते हुए स्कूलों की छुट्टियां सालों पुरानी परंपरा के अधीन 26 जून से ही कर दी गई है। दो अगस्त के बाद सरकारी स्कूल खुल जाएंगे, लेकिन उसके बाद भी पिछले साल की तरह बरसात चलती रही, तो क्या होगा। क्या पिछले सालों में स्कूली बच्चों के साथ हुए हादसे बदस्तूर जारी रहेंगे, यह अहम सवाल है। मौसम विभाग का कहना है कि अभी हिमाचल में प्री-मानसून की बौछारें पड़ रही हैं। जुलाई के पहले सप्ताह यहां मानसून पूरी तरह सक्रिय होगा। समझा जा सकता है कि जब मानसून जुलाई में आएगा, तो यकीनन लंबा चलेगा। ऐसे में यदि ग्रीष्मकालीन स्कूलों में छुट्टियां 15 जुलाई के बाद होती, तो शायद बच्चों के साथ उनके अभिभावकों को भी बड़ी राहत मिल सकती। जाहिर है कि हिमाचल प्रदेश में भयंकर बारिश होती है और हर साल बड़़ी तबाही इस बरसात में होती रही है। गौर करिए कि दशकों से चले आ रहे छुट्टियों के शेड्यूल से छेड़छाड़ की जरूरत क्यों पड़ी? क्या अब हिमाचल में मानसून दिन और माह भी सरकार तय करेगी? किसके दबाव में है सरकार?

मानसून ब्रेक कल से 14 अगस्त तक

शिमला- सरकार ने 26 जून से ग्रीष्मकालीन स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया है। सरकार की अधिसूचना के तहत जिला लाहुल-स्पीति के अतिरिक्त अन्य जिलों के ग्रीष्मकालीन स्कूलों में बरसात की छुट्टियां 26 जून से दो अगस्त तक रहेंगी। वहीं शीतकालीन स्कूलों में पहली जनवरी से 15 फरवरी सर्दियों में अवकाश रहेगा, जबकि कुल्लू में मानसून ब्रेक 23 जुलाई से 14 अगस्त तक रहेगी। किन्नौर, पांगी और भरमौर के शीतकालीन सरकारी स्कूलों में मानसून ब्रेक 22 जुलाई से 27 जुलाई तक होगा। इसके अतिरिक्त अन्य शीतकालीन सरकारी स्कूलों में मानसून ब्रेक 22 जुलाई से 27 जुलाई तक रहेगा। 2019-20 में अन्य अवकाश के शेड्यूल में ग्रीष्मकालीन स्कूलों में परीक्षा परिणाम के बाद पहली अपै्रल से चार अप्रैल तक अवकाश रहेगा, वहीं दिवाली पर चार दिन का अवकाश, जिसमें दिवाली से दो दिन पहले और दो दिन बाद अवकाश दिए जाएंगे। ग्रीष्मकालीन स्कूलों में होने वाले शीतकालीन अवकाश 26 दिसंबर से 31 दिसंबर तक रहेंगे। जिला कुल्लू में दशहरा ब्रेक दस दिनों का, शीतकालीन अवकाश 26 दिसंबर से 11 जनवरी  और दिवाली पर दो दिनों का अवकाश दिया जाएगा। इसमें दिवाली से एक दिन पहले और एक दिन बाद अवकाश दिया जाएगा। लाहुल-स्पीति में ग्रीष्मकालीन अवकाश 17 जुलाई से 27 अगस्त तक रहेगा व  दशहरा ब्रेक दस दिन तक देने का फैसला लिया गया है। शीतकालीन स्कूलों में दिवाली ब्रेक चार दिन की रहेगी। इसमें दिवाली से दो दिन पहले और दो दिन बाद अवकाश रहेगा। शीतकालीन सरकारी स्कूलों में पहली जनवरी से 15 फरवरी तक शीतकालीन अवकाश रहेगा।

तब बदलाव कर देंगे

शिक्षा विभाग के अनुसार एक बार फिर अगले वर्ष छुट्टियों के शेड्यूल पर फीडबैक ली जाएगी। इस साल भी छात्रों को बरसात के दौरान ज्यादा दिक्कतें आई, तो वेकेशन में बदलाव किया जा सकता है।

संवेदनहीन लगते हैं शिक्षा मंत्री…

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स्कूल पहुंचेंगे कैसे

दुर्भाग्यवश मंत्री व निदेशक को चिंता नहीं है कि जब भर बरसात अगस्त माह में स्कूल खुलेंगे, तो मासूम करेंगे क्या? रास्ते बंद होंगे। नदियां-नाले उफान पर होंगे, उस समय स्कूल पहुंचेंगे कैसे?

सरकार खुद कन्फ्यूज़

सरकार छुट्टियों के शेड्यूल को लेकर खुद भी असमंजस में रही और उसने स्कूल प्रबंधकों व अभिभावकों को भी टेंशन दे दी। कई निजी अकादमियां बच्चों को इन छुट्टियों में बाहर घुमाने के लिए ले जाती हैं, जिनकी तैयारियां समय पर अवकाश घोषित नहीं होने से धरी की धरी रह गईं। इसी तरह से अभिभावक भी परेशान थे, जो बच्चों के साथ अपना शेड्यूल नहीं बना सके। दो दिन पहले घोषणा होने से समय पर नौकरीशुदा लोग बाहर जाने का कार्यक्रम नहीं बना पाए, जिनका खुद                     का शेड्यूल बदल गया।

कहीं और ही छुट्टियों का जुगाड़ तो नहीं…

2018 में भी अगस्त-सितंबर में भारी बरसात के चलते कई बार देर रात या सुबह-सुबह अवकाश घोषित हुए थे, तो कहीं यह व्यवस्था छुट्टियों के लिए जुगाड़ का हिस्सा तो नहीं। ऐसा भी हो सकता है नीति निर्माताओं के बच्चे या तो प्रदेश से बाहर पढ़ते हैं या बोर्डिंग स्कूलों में हैं, इसलिए उन्हें या तो बरसात के जख्मों का ही पता नहीं है या फिर वे लापरवाह हैं।

छुट्टियों में सिर्फ एक दिन का फर्क

सरकार की ओर से जारी किए गए छुट्टियों के नए शेड्यूल में मात्र एक दिन का फर्क है। पिछले वर्ष जहां 25 जून को अवकाश दिया जाता था, तो इस बार 26 जून से इसे किया गया है।  

ज़रूरत पड़ी तो नए सत्र से बदल देंगे शेड्यूल

उच्च शिक्षा निदेशक अमरजीत शर्मा का कहना है कि इस बार भी छुट्टियों के शेड्यूल को मैदानी क्षेत्रों के शिक्षकों के सुझाव लेने के बाद लिया गया है। अगर जरूरत पड़ी, तो नए सत्र में इसमें बदलाव किया जा सकता है।

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