इस बार सदन में नहीं दिखेंगे पूर्व प्रधानमंत्री

नई दिल्ली –पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का राज्यसभा का कार्यकाल शुक्रवार को समाप्त हो गया। इसके साथ ही यह तय हो गया है कि जब नई सरकार के गठन के बाद 17 जून को पहले संसद सत्र की शुरुआत होगी, तो कोई पूर्व पीएम सदन में मौजूद नहीं होंगे। बता दें कि जेडीएस नेता और पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा भी तुमकुर से लोकसभा चुनाव हार गए हैं। दरअसल, मनमोहन सिंह के लिए दोबारा राज्यसभा चुनकर आना मुश्किल लग रहा है। मनमोहन सिंह, जिन्हें 2008 की मंदी से भारत को बाहर निकालने का श्रेय जाता है, वह 1991 में असम से पहली बार राज्यसभा के लिए चुने गए थे। तब से पहली बार होगा, जब वह संसद में नहीं दिखेंगे। असम विधानसभा में कांग्रेस के 25 विधायक हैं, जबकि राज्यसभा सदस्य के चुनाव में पक्ष में वोट कराने के लिए 43 विधायकों की जरूरत होगी। अगर उसे ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक फं्रट के 13 विधायक समर्थन कर भी देते हैं तो भी पार्टी को पांच और विधायक की जरूरत होगी। पार्टी उन्हें दूसरे राज्यों से भी राज्यसभा नहीं भेज सकती, जहां सीटें खाली हैं। असम में दो सीटों पर बीजेपी और एजीपी के सदस्य चुनकर राज्यसभा गए हैं, जबकि बाकी की नौ खाली सीटों में चार ओडिशा, तमिलनाडु, बिहार और गुजरात हैं। गुजरात को छोड़कर कांग्रेस के पास जरूरी नंबर नहीं है। मनमोहन कर्नाटक, छत्तीसगढ़, राजस्थान या पंजाब से भी चुनकर राज्यसभा नहीं जा सकते क्योंकि अभी वहां सीटें खाली नहीं हैं। वैसे कांग्रेस चाहे तो अपने किसी मौजूदा राज्यसभा सांसद को इस्तीफा दिलवाकर मनमोहन के लिए जगह खाली कर सकती है। हालांकि, पार्टी सूत्रों का कहना है कि उन्होंने इस पर विचार नहीं किया है। 28 साल सांसद रहते हुए मनमोहन सिंह दस साल के पीएम और छह साल तक राज्यसभा में विपक्ष के नेता रहे। मनमोहन सिंह आखिरी बार 2013 में ऊपरी सदन के लिए चुने गए थे।

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