ईद आई…प्यार का पैगाम लाई

चंबा में ईद पर खुदा से सुख-शांति व बरकत की दुआओं की दी तालीम

चंबा –30 नहीं..इस बार 29 दिन बाद ही ईद का चांद निकल आया। जी हां! पूरे 30 दिन आत्मा व मन की शांति के लिए खुदा वास्ते रोजे (उपवास) रखने के  बाद रोजेदारों सहित समस्त मुस्लिम समाज की ओर से अल्लाह का शुक्रिया करने के लिए बुधवार को घरों में हर्षोल्लास के साथ ईद का त्योहार मनाया। अन्य त्योहारों की तरह ईद उल फिन्न मुस्लिमों सहित अन्य समुदाय के लोगों के लिए प्रेम, दया व स्नेह का पेगाम लाई। इस दिन मुसिलमों ने खुदा से सुख शांति के साथ बरकत की दुआआंे की तालीम दी। इस त्योहार को गरबों को फिन्न (दान) देने के त्योहार के रूप में भी मनाया जाता है। साधन संपन्न इस दिन गरीबों के लिए आर्थिक के साथ अन्य तरह की सहायता देते हैं ताकि अमीरों की तरह गरीबों की भी खुुशी-खुशी ईद मन जाए। खुदा की नजरों में तो अमीर गरीब एक बराबर हैं, लेकिन कर्मभूमि पर इनसान को जितना मिला उसी से ही निर्वाहन करना पड़ता है। ईद के मौके पर मुस्लिमों सहित अन्य समुदाय के लोगों की ओर से भी एडवांस में ही स्वादिष्ठ पकवान के वाद विशेष लिवास का प्राबधान किया जाता है, त्योहार के दिन में इसे रिशतेदारों के साथ ईष्ट मीत्रों के बीच बांटा जाता है। इस्लाम के पैगंबर हजरत मोहम्मद ने भी इस त्योहार (ईद उल फिन्न) को विभिन्न धर्मोंे के अनुयाओं के साथ मनाने के साथ सब के लिए सुख शांति व बरकत की दुआएं मांगने की तालीम दी है। साथ ही उन्होंने नफरत, असहिष्णुत व जुल्म को खत्म कर पूरी मानवता के लिए प्रेम, रहमत, रूहानियां (भक्ति) इबादत (पूजा) साथ सामाजिक सेवा पर बल दिया। उन्होंने जरूरतमंदों की जरूरतों को पूरा कर धार्मिक व सामाजिक पर्वाग्रहों से दूर रहने की तालीम दी है। उधर मुस्लमानों ने गले मिलकर खुदा से एक दूसरे के लिए प्यार व बरकत की दुआंए मांगी हैं। वहीं हिंदू सहित अन्य समुदाय के लोगांे ने भी मुसलिम भाईयों के लिए ईद के इस धार्मिक पर्व पर इशतिहार के साथ ईद की बधाई दी।

 

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