ईसी सदस्य को सौंपा मांग पत्र

शिमला—हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई ने कैंपस में ईसी सदस्य को मांग पत्र सौंपकर छात्रों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। कैंपस उपाध्यक्ष रविंद्र ने बताया कि विश्वविद्यालय में लगातार शोध के स्तर को निम्न किया जा रहा है, जिसके लिए पूरी तरह से प्रशासन जिम्मेदार है। प्रशासन ने अपने खास लोगों की एडमिशन पीएचडी में करवाकर सरेआम यूनिवर्सिटी के एक्ट और ऑर्डिनेंस को दरकिनार किया है। एसएफआई ने मांग उठाई है कि इन सभी एडमिशन कराने में शामिल अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। इसके साथ-साथ जिन लोगों की एडमिशन हुई है, उसे तुरंत प्रभाव से निरस्त करने की मांग की है। कार्यकर्ताओं ने कहा कि कैंपस के अंदर लोकतांत्रिक माहौल को पूरी तरह से खत्म करने की कोशिश हो रही है। किसी भी भ्रष्टाचार और छात्र विरोधी नीति का विरोध करने पर प्रशासन द्वारा छात्रों को उनके घरों पर झूठे पत्र भेजकर मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है। हाल ही में आए रुसा के पांचवे सेमेस्टर रिजल्ट में बहुत सारे छात्र फेल हुए हंै, बहुत सारे छात्रों के नंबर दस से भी कम हैं। ईसी के सदस्यों को ज्ञापन सौंपते हुए एसएफ आई कार्यकर्ताओं ने कहा कि तुरंत प्रभाव से इस मामले में री-इवेल्यूएशन और री-अपीयर की जाएं। कैंपस सह सचिव पंकज वर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय में ब्वायज होस्टलों के छात्रों से ट्वेंटी फोर आवर लाइब्रेरी जाने से रोका जा रहा है। छात्रों को रात को दस बजे के बाद अनुमति होने के बावजूद भी रोका जा रहा है। बीती तीन रातों से छात्र मजबूरन खुले आसमान के नीचे सारी रात बाहर पढ़कर अपना विरोध जता रहे हैं। एसएफ आई ने इस मुद्दे को प्राथमिकता देने की गुहार ईसी सदस्यों से की है। इसके साथ-साथ छात्र संघ चुनाव की बहाली को भी प्रमुखता से उठाया गया। एसएफआई ने चेतावनी दी है कि विश्वविद्यालय की ईसी इन मुद्दों पर सकारात्मक निर्णय लेकर छात्र हितैषी होने का प्रमाण दंे। अन्यथा एसएफ आई मजबूरन आर-पार की लड़ाई लड़ने को मैदान में कूदेगी।

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