उग्रवादियों पर सर्जिकल स्ट्राइक

भारत-म्यांमार सेना का बॉर्डर पर बड़ा एक्शन; कई ठिकाने तबाह, 70-80 दहशतगर्द दबोचे

नई दिल्ली —पूर्वोत्तर के क्षेत्रों में भारत और म्यांमार ने मणिपुर, नागालैंड और असम में सक्रिय विभिन्न उग्रवादी संगठनों पर संयुक्त कार्रवाई की है। दोनों देशों की सेनाओं ने अपनी-अपनी सीमाओं में उग्रवादी ठिकानों को तहस नहस कर दिया है। कार्रवाई के दौरान भाग रहे उग्रवादियों को पकड़ भी लिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक सेना ने उग्रवादियों के खिलाफ इस मुहिम को ‘आपरेशन सनशाइन-2’ नाम दिया है। भारतीय सीमा के अंदर इस आपरेशन में इंडियन आर्मी के दो बटालियन के अलावा विशेष सुरक्षा बल, असम रायफल्स के जवान इस सशस्त्र कार्रवाई में शामिल थे। म्यांमार की सेना के चार ब्रिगेड भी उग्रवादियों के खिलाफ एक्शन में शामिल रहे। इससे पहले, इसी साल 22 से 26 फरवरी के बीच आपरेशन सनशाइन-1 चलाया गया था। उस वक्त भारतीय सेना ने भारतीय क्षेत्र के भीतर संदिग्ध अराकान विद्रोही कैंपों के खिलाफ कार्रवाई की थी। भारतीय सेना की कार्रवाई के दौरान भाग रहे विद्रोहियों को सेना धर दबोचा। वहीं, आपरेशन सनसाइन-2 के तहत भारतीय सेना ने करीब 70 से 80 उग्रवादियों को पकड़ा है। फिलहाल उन्हें पुलिस के हवाले कर दिया गया है। सूत्रों ने बताया कि आपरेशन सनशाइन-2 के तहत एनएससीएन-के के कम से कम सात से आठ कैंपों के अलावा उल्फा केएलओ, एनईएफटी के ठिकानों को म्यांमार की सेना से नष्ट कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी सूत्रों ने इस कार्रवाई को बेहद कामयाब बताया है। यह आपरेशन दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी तालमेल से अंजाम दिया गया। अधिकारी ने बताया कि आपरेशन सनशाइन-1 के दौरान दोनों देशों की सेनाओं के बीच पैदा हुए भरोसे की वजह से इस बार मिशन कामयाब रहा है। अधिकारी के अनुसार 2015 में भारतीय सेना ने उग्रवादी संगठन एनएससीएन-के के खिलाफ सीमा पार से चलाए गए अभियान की वजह से म्यांमार सेना में नाराजगी थी, लेकिन मिलकर काम करने की वजह से पुरानी शिकायत एक तरह से खत्म हो गई है।

इन्हें बनाया निशाना

जिन उग्रवादी संगठनों को निशाना बनाया गया, उनमें कामतापुर लिबरेशन ऑर्गेनाइजेशन (केएलओ), एनएससीएन (खापलांग), उल्फा (1) और नेशनल डेमोके्रटिक फं्रट ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) शामिल हैं। सूत्रों ने बताया कि दोनों देश खुफिया सूचनाओं और जमीनी स्थिति के आधार पर अभियान का अगला चरण भी शुरू कर सकते हैं। अभियान में भारतीय सेना के साथ ही असम रायफल्स के जवान भी शामिल थे।

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