उपेक्षा की धुंध में खोई रमणीक स्थल निगाली की सुंदरता

पांवटा साहिब—प्रदेश के जिला सिरमौर के दून क्षेत्र पांवटा का एक पहाड़ी इलाका ऐसा भी है, जिसे यदि पर्यटन निगम निखारे तो वह शिमला और कुल्लू-मनाली से कम नहीं होगा। बात उपमंडल के आंजभौज के गिरिपार क्षेत्र की ग्राम पंचायत बनौर के निगाली की हो रही है। कई बीघा मंे चारों ओर से घने देवदार के पेड़ों से घिरा यह क्षेत्र अपनी मनमोहक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। यह बात अलग है कि इसकी सुंदरता राजनैतिक उपेक्षा की धुंध मंे कहीं खो सी गई है। समुद्र तल से करीब 1600 मीटर ऊंचाई पर स्थित इस रमणीक स्थल मंे पर्यटन की जहां अपार संभावनाएं हैं, वहीं यहां पर कृषि व बागबानी के वैज्ञानिक तरीके कई मायनों में सफल हो सकते हैं। पांवटा साहिब से करीब 40 किलोमीटर दूर इस हिल स्टेशन में कोई सर्दी ऐसी नहीं जाती जब यहां बर्फ न गिरती हो। यहां पर वर्तमान में बनौर गांव के करीब 60 परिवार रहते हैं जिनका मुख्य व्यवसाय कृषि और बागबानी है। यहां पर बहुत उपजाऊ भूमि है। हालांकि यहां पर जंगली जानवर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, लेकिन फिर भी यहां के कृषक रात-दिन रखवाली कर अपनी फसलों की सुरक्षा करते हैं। यहां पर पारंपरिक खेती के साथ-साथ कैश क्रॉप्स भी उगाई जाती है, जिसमें टमाटर, मिर्च और खीरा आदि शामिल है। नाशपाती और प्लम की तो यहां भरमार है। हालांकि किसानों की अनभिज्ञता के कारण यहां पर बागबानी के नए तरीके और फलों की नई प्रजातियां नहीं लग पाई हैं, लेकिन फिर भी अपनी मेहनत के बूते इतनी ऊंचाई पर माशू गांव के एक किसान कृपाल सिंह ने यहां पर अनार के पौधों को सफलतापूर्वक बड़ा किया है। इसमंे अब फल भी आने लगे हैं। गांव के लोगों ने आपसी सहयोग से इस क्षेत्र को सड़क से भी जोड़ दिया है जिससे यह पांवटा के लोगों के वन-डे टुअर के लिए भी हिल स्टेशन का विकल्प बन गया है। हालांकि राजनैतिक उपेक्षा और पर्यटन निगम की अनदेखी के चलते निगाली को अभी तक वह पहचान नहीं मिल पाई है जिसका वह हकदार है। यह क्षेत्र सौंदर्य से लवरेज है। जरूरत सिर्फ पर्यटन निगम की नजर-ए-इनायत की है। यहां पर किसानों और बागबानों को यदि विभाग नई किस्म की उन्नत्त खेती के बारे में जानकारी दे तो वह हरित क्रांति ला सकते हैं। यही नहीं इस क्षेत्र में ओर भी कई विकल्प उभरकर सामने आ सकते हैं।               

जड़ी-बूटियों का है अपार भंडार

जानकार बताते हैं कि निगाली क्षेत्र मंे बेशकीमती जड़ी-बूटियों का अपार भंडार है, लेकिन स्थानीय लोग इससे अनभिज्ञ हैं। यहां पर कई मर्ज की प्राकृतिक दवाएं प्रकृति की गोद में छिपी हुई है, जिन्हें सिर्फ तलाशने की जरूरत है। इस लिहाज से भी यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उभर कर सामने आ सकता है।

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