ऊना में वीर सपूत महाराणा प्रताप को कोटि-कोटि नमन

ऊना—आजादी के एक ही परिवार की सरकार लगभग 55 वर्षों तक देश में रही और उनको इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन करना चाहिए था। लेकिन इस सरकार ने केवल अपने परिवार के लोगों को ही देशभक्त माना। जो देश के शूरवीर थे उनके साथ एक तरह का भेदभाव सरकार ने किया। यह बात महाराणा प्रताप सिंह की जयंती पर होटल सनशाइन(चताड़ा मोड़) में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए ग्रामीण विकास, पंचायती, पशु एवं मत्स्य विभाग के मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कही। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप देश की आन-बान-शान है। महाराणा प्रताप ने देश को मुगलों से आजाद करने के लिए लंबे समय तक संघर्ष किया और अपना परिवार व सुख-सुविधाएं त्याग दीं। मुगलों की गुलामी करने की बजाए लगातार संघर्ष करते रहे युद्ध लड़े और जंगलों में रहकर घास की रोटी भी खाई। भारत मां के ऐसे वीर सपूत को मैं कोटि-कोटि नमन करता हूं और महाराणा प्रताप की जयंती पर समस्त देशवासियों को बधाई देता हूं। क्षत्रिय महासभा के प्रदेशाध्यक्ष भुपिंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि महाराजा महाराणा प्रताप एक ऐसी शख्सियत थे, जिन्होंने हिंदू राज्य स्थापित करने के लिए अपने वंश की बलि दे दी। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकारों ने महाराणा प्रताप की उसी लड़ाई के बारे में बताया जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। लेकिन जो लड़ाइयां महाराज प्रताप ने जीतीं उनके बारे में कहीं कोई जिक्र तक नही किया गया। इसलिए हमारी सरकार से गुजारिश है कि हिंदू समाज के असली इतिहास को सामने लाया जाए। भूपिंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि महाराणा प्रताप ने केवल राजपूतों के लिए ही लड़ाइयां नही लड़ी हैं, बल्कि उन्होंने देश के सभी वगांर्े, धमांर्े व जातियों के के साथ हो रही ज्यादतियों के खिलाफ लड़ाइयां लड़ीं हैं। उसमें जातिवाद का कोई नारा नही था और हिंदू धर्म की रक्षा के लिए महाराणा प्रताप ने अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। इस अवसर पर महासभा के अन्य सदस्य भी उपस्थित थे।

रैली निकाल याद किए महाराणा प्रताप

महाराणा प्रताप की जयंती पर क्षत्रिय महासभा द्वारा विशाल रैली निकाली गई। जिसका नेतृत्व महासभा के प्रदेशाध्यक्ष भुपिंद्र सिंह ठाकुर ने किया।  रैली प्रदेश के प्रवेशद्वार मैहतपुर से शुरू हुई जो कि देहलां, बहडाला, जलग्रां, रक्कड़ से होते हुए ऊना पहंुची और जहां से दोबारा वापस कार्यक्रम स्थल पर संपन्न हुई। बाइकों व कारों पर सवार युवाओं ने भारत माता की जय…, जय भवानी इत्यादि के नारों से महाराणा प्रताप को याद किया और उनके पद्चिन्हों पर चलने का प्रण लिया।

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