एचपीएमसी पर खर्च होंगे 240 करोड़

बागबानी विकास परियोजना की मध्यावधि समीक्षा बैठक में बोले मुख्य सचिव

 शिमला —वर्ष 2023 तक एचपीएमसी पर 240 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे, जबकि सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए 330 करोड़ रुपए व्यय किए जाएंगे। यह बात मुख्य सचिव बीके अग्रवाल ने विश्व बैंक के एक मिशन और राज्य सरकार के साथ एक मध्यावधि समीक्षा बैठक के दौरान कही। बैठक में प्रारंभिक परियोजना के प्रारूप का पुनर्मूल्यांकन किया गया, जिसमें उद्देश्यों, गतिविधियों, कार्यान्वयन तंत्र और क्षेत्र की प्राथमिकताएं शामिल हैं। यह मिशन तीन से 14 जून तक हिमाचल में फील्ड दौरे पर था और मिशन ने राज्य के विभिन्न हिस्सों जैसे तीसा, केलांग और जंजैहली का दौरा किया। स्टाफ की कमी के बारे में अवगत करवाए जाने पर मुख्य सचिव ने कहा कि हिमाचल प्रदेश विपणन निगम, एचपीएमसी तथा हिमाचल प्रदेश विपणन बोर्ड को आउटसोर्स आधार पर पेशेवर व्यक्तियों को नियुक्त करने को कहा। उन्होंने विश्वविद्यालय से पौधों की नई किस्मों पर कार्य करने तथा बागबानों को महत्त्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध करवाने को कहा। बागबानों का उत्पादन तथा आय बढ़ाने के लिए नई तकनीक पर गहन शोध किया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रदेश का एक प्रतिनिधि दल फल बाजार में अग्रणी देशों के भ्रमण पर जाकर नर्सरी प्रबंधन तथा नए किस्मों के फलों के पौधों पर अध्ययन करे। हिमाचल प्रदेश बागबानी विकास परियोजना के निदेशक दिनेश मल्होत्रा ने कहा कि परवाणू तथा जरोल में प्रसंस्करण संयंत्रों का स्तरोन्नयन किया जाएगा, जबकि ठियोग के पराला में एक नया संयंत्र लगाया जाएगा। प्रदेश में आठ नई विपणन मंडियां बनाई जाएंगी, जबकि आठ विपणन मंडियां स्तरोन्नत होंगी। टास्क टीम लीडर एवं कृषि विशेषज्ञ मनीवनन पार्थी ने एचपीएमसी तथा बागवानी विभाग में स्टाफ की कमी के बारे भी अवगत करवाया। अतिरिक्त मुख्य सचिव बागबानी आरडी धीमान, सचिव सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य आरएन बत्ता, निदेशक बागबानी, मुख्य प्रबंधक एचपीएमसीए प्रबंध निदेशक एचपी मार्केटिंग बोर्ड, मिशन सदस्य मेरी कैथरीन हॉलीफिल्ड, चाकिब जीनैन, अरविंद झांब तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे।

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