एमर्जेंसी में ड्रोन से पहुंचेंगी दवाइयां

योजना : हिमाचल के दुर्गम क्षेत्रों में बहुमूल्य जिंदगियां बचाने के लिए कारगर कदम की तैयारी

मंडी – हिमाचल के कई दुर्गम क्षेत्र बरसात या सर्दी में दुनिया से कट जाते हैं और मरीज जरूरी दवाएं और इंजेक्शन न मिलने से कई मर्तबा दम तोड़ देते हैं, लेकिन भविष्य में यह दिक्कत हमेशा के लिए खत्म होने वाली है। दुर्गम क्षेत्रों में एमर्जेंसी के दौरान ड्रोन से वैक्सीन और दवाइयां पहुंचाने के प्रोजेक्ट पर हिमाचल काम चल रहा है। चंबा जिला में पिछले साल इसका ट्रायल भी हो चुका है। अब यह प्रोजेक्ट यदि धरातल पर उतरता है तो मुख्यमंत्री के गृह जिला से इसकी शुरुआत हो सकती है। फिलहाल भारत में इस तरह की व्यवस्था चुनिंदा राज्यों में ही है। ड्रोन से दुर्गम क्षेत्रों और एमर्जेंसी में दवाइयां पहुंचाने का प्रोजेक्ट एमडी एनएचएम हिमाचल को भी सौंपा जा चुका है। तकनीकी मदद के लिए इस प्रोजेक्ट में आईआईटी (इंडियन इंस्टीच्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) मंडी को भी शामिल किया गया है। प्रोजेक्ट पर अंदरखाते कदमताल शुरू हो चुकी है। अब प्रोजेक्ट शुरू होता है तो स्वास्थ्य क्षेत्र में यह क्रांतिकारी कदम साबित होगा। बाढ़, भू-स्खलन और बर्फबारी में दुनिया से कट जाने वाले दुर्गम क्षेत्रों में ड्रोन से दवा पहुंचाना एक शानदार प्रयास होगा। यही नहीं, किसी एमर्जेंसी में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। बताया जा रहा है कि प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने के लिए केंद्र से कई अहम मंजूरियां लेनी होती हैं। इस पर भी काफी काम हो चुका है। फिलहाल देश भर में कहीं भी ड्रोन के माध्यम से वैक्सीन पहुंचाने का काम नहीं हो रहा है। इस लिहाज से अगर हिमाचल इसकी शुरुआत करता है तो पूरे देश को राह दिखा सकता है। इतना तय है कि अगर इसकी शुरुआत होती है तो यह कदम स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम साबित होगा, क्योंकि इससे आपातकाल में दवाई की किल्लत से होने वाली मौतें टाली जा सकेंगी। साथ ही खर्च भी कम होगा।

सात गुना तक कम होता है खर्च

प्रोजेक्ट पर काम कर रही टीम के मुताबिक ड्रोन के माध्यम से दवाइयां या वैक्सीन पहुंचाने पर लागत और समय दोनों की बचत होती है। अमूमन गाड़ी से दवा पहुंचाने में आने वाले खर्च में सात गुना खर्च में और समय की नौ गुना तक की बचत होती है।

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