एवरेस्ट विजेता विवेक ठाकुर को सरकार से नहीं मिली शाबाशी

नाहन—दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को हाल ही में फतेह करने वाले सिरमौरी लाल व एनएसजी के ब्लैक कैट कमांडो विवेक ठाकुर को जिला सिरमौर प्रशासन व सरकार की और से कोई शाबाशी नहीं मिली है। अपनी जान हथेली पर रख कर कुछ दिनों पूर्व विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को फतेह  करने वाले सिरमौरी बेटे विवेक ठाकुर को सोशल व प्रिंट मीडिया की सुर्खियां खूब मिली परंतु सरकार की और से शाबाशी के दो शब्द भी कमांडो विवेक ठाकुर की हौसला अफजाई में नहीं आए। सिरमौर के जांबाज बेटे विवेक ठाकुर पर हिमाचल सरकार की नजर नहीं पड़ी। या यू कहिए के हिमाचल सरकार ने प्रदेश में विकास कार्यों को इतनी रफ्तार दे रखी है कि उन्हें यह जांबाज नजर ही नहीं आया । यहां तक कि जिला सिरमौर प्रशासन की ओर से भी इस जांबाज को किसी भी प्रकार का कोई उचित सम्मान नहीं दिया गया । उसकी हौसला अफजाई के लिए सरकार का कोई नुमाइंदा सामने नहीं आया । सरकार व प्रशासन की युवाओं की प्रति इस तरह की बेरुखी कहीं न कहीं ऐसे युवाओं के जज्बे को आघात पहुंचता है जो देश व प्रदेश का नाम ऊंचा करने के लिए अपनी जान तक दांव पर लगा देतें हैं । गौर हो की विवेक ठाकुर ने बेस कैंप से 19 मई को चढ़ाई शुरू की थी। 22 मई की सुबह विवेक ने एवरेस्ट को सुबह 5ः30 बजे के आसपास फतेह कर लिया। खास बात यह है कि घर पर बेटी की किलकारी गूंजी मगर खुद माउंट एवरेस्ट को फ्तेह कर देश और दुनियां में हिमाचल व सिरमौर का नाम गौरवान्वित करने निकल गए । विवेक ठाकुर ने जवाहर नवोदय नाहन में पढ़ाई पूरी करने के बाद नाहन डिग्री कालेज से बीएससी की शिक्षा हासिल की। पत्नी प्रियंका चौहान एनएसजी के प्राइमरी स्कूल में एक शिक्षिका के रूप में कार्यरत रही। महज 22 साल की उम्र में ही विवेक ने सीआईएसएफ  में सब-इंस्पेक्टर का पद हासिल कर लिया था। इसके बाद विवेक का एनएसजी में चयन हुआ था। करीब चार साल से विवेक एनएसजी में बतौर ब्लैक कैट कमांडो कार्यरत हैं।

श्रीरेणुकाजी के बड़ोन के रहने वाले हैं विवेक ठाकुर

एनएसजी के जांबाज कमांडो विवेक ठाकुर में देशभक्ति का जज्बा बचपन से ही कूट-कूट कर भरा हुआ था। मूलत श्रीरेणुकाजी के बड़ोन के रहने वाले विवेक नेशनल सिक्योरिटी गार्ड 17 सदस्य टीम में हिस्सा दियाए जिसे गृह मंत्रालय द्वारा माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई का टास्क दिया गया। एनएसजी की टीम लेफ्टिनेंट कर्नल जयप्रकाश के नेतृत्व में माउंट एवरेस्ट को फतेह करने निकली थी। कमांडो विवेक ठाकुर ने बचपन से ही मुश्किलों का सामना किया है। छोटी सी उम्र में पिता गुमान सिंह के निधन के बाद विवेक पर कई चुनौतियां आ गई थी।

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