एसपी साहब! हमारे बच्‍चों को चिट्टा माफिया से बचाओ

मैहतपुर। नशे माफिया की दिन-प्रतिदिन जडं़े फैलती जा रही हैं और इसका व्यापारीकरण हर गली-मोहल्ले, चौक-चुराहे तथा गांव के आवादी से बाहर धार्मिक मंदिर व तालाबों के ईद-गिर्द बनी आराम करने वाली जगहों पर आम हो रहा है। रातोंरात अमीर बनने के चक्कर में नशा माफिया अपने धंधे को इन जगहों का सहारा लेकर फैला रहे हैं। ज्यादातर युवा पीढ़ी इस दलदल में फंसती जा रही है। युवा पीढ़ी अपने मित्र दोस्त को गाडि़यों में घूमते हुए देखकर अपने आप को कंट्रोल में न रखते हुए पूछते हंै कि दोस्त आज कल क्या काम करते हो। तो दोस्त पहले गाड़ी में घुमाते हैं। फिर धीरे-धीरे नशा सप्लाई करवाने में उनका सहारा लेते हंै। उसके बाद वह दोस्त भी इस नशे की गिरफ्त में आ जाता है। जोकि समाज में आने वाले समय में एक बड़े खतरे के रूप में उभर सकता है। आज-कल एक नशा चिट्टे के नाम पर काफी मशहूर है। इसका स्वाद चखने के लिए युवा पीढ़ी भी पीछे नहीं है। मां-बाप बच्चों को स्कूल, कालेज में पढ़ने के लिए भेजते हंै। तो उनके बच्चे चिट्टे के कारोबार की बारीकियों को सीख रहे हैं। और उसका सेवन भी करने में गुरेज नहीं कर रहे हंै। इसमें देखा गया है कि बालक और नाबालिगबच्चे अपने माता-पिता का नाजायज फायदा उठाकर जल्दी अमीर बनने के चक्कर में और जल्दी बड़े सपने पूरे करने के लिए चिट्टे के व्यापारीकरण में फंस रहे हंै। इस नई युवा पीढ़ी को इस धंधे में जुड़ना तो आसान लग रहा है, लेकिन इससे मुक्त होना बड़ा ही मुशकिल है। सूत्रों से पता चला है कि नगर परिषद मैहतपुर-बसदेहड़ा में यह धंधा एक मोबाइल फोन की तरह फैलता जा रहा है। बुद्धिजीवी वर्ग ने पुलिस अधीक्षक ऊना से इस धंधे से जुड़े माफिया और पुलिस द्वारा इन माफियों पर नकेल कसने को लेकर मांग की है।

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