औषधीय पौधों की खेती के लिए बनेंगे किसानों के क्लस्टर

शिमला – प्रदेश में औषधीय पौधों की खेती के लिए राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत किसानों के क्लस्टर बनाए जाएंगे। प्रदेश आयुर्वेद विभाग के मुताबिक केंद्र सरकार से मिलने वाली वित्तीय सहायता का लाभ लेने के लिए किसानों के क्लस्टर के पास कम से कम दो हेक्टेयर भूमि होना अनिवार्य है। किसानों के क्लस्टर 15 किलोमीटर दायरे के भीतर साथ लगते तीन गांव हो सकते हैं। खेती के लिए बंधक भूमि का भी प्रयोग किया जा सकता है। राष्ट्रीय आयुष मिशन द्वारा वर्तमान में अतिस, कुटकी, कुठ, सुगंधवाला, अश्वगंधा, सर्पगंधा तथा तुलसी औषधीय पौधों की खेती के लिए 100.946 लाख रुपए की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। लघु विधायन तथा दो भंडारण गोदामों के लिए 40 लाख रुपए, 25 लाख रुपए बीज केंद्र तथा पांच लाख रुपए जैविक परमाणिकता के लिए स्वीकृत किए गए हैं। पिछले साल मोदी सरकार ने औषधीय पौधों के लिए राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत 75.54 लाख रुपए स्वीकृत किए थे, जिसमें से दो छोटी नर्सरियों के लिए 12.50 लाख रुपए, अतिस की खेती के लिए 8.04 लाख रुपए, कुटकी व कुठ के लिए 25 लाख रुपए तथा 30 लाख रुपए ड्राइंग शैड व गोदामों के लिए स्वीकृत किए गए हैं। उसके बाद ही प्रदेश आयुर्वेद विभाग ने क्लस्टर बनाने की कवायद शुरू कर दी है। इसके अलावा 64 लाख रुपए का एक प्रस्ताव औषधीय पौधों की खेती के लिए भारत सरकार को भेजा गया है। इसके बाद प्रदेश में औषधीय खेती को बढ़ावा मिलेगा।

जोगिंद्रनगर में सेंटर के लिए 748 लाख का अनुदान

आयुष मंत्रालय के राष्ट्रीय औषधीय पौधे बोर्ड ने जोगिंद्रनगर में क्षेत्रीय एवं सुविधा केंद्र की स्थापना के लिए 748 लाख रुपए के अनुदान को स्वीकृति प्रदान की है। हिमाचल प्रदेश में औषधीय पौधों से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के राष्ट्रीय औषधीय बोर्ड की तर्ज पर प्रदेश में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य औषधीय पादप बोर्ड का गठन किया गया है।

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