कब बनेगा पांवटा में सामुदायिक भवन

पांवटा साहिब—गुरु की नगरी पांवटा साहिब दिनोंदिन विकास के रास्ते पर अग्रसर है। यहां पर बड़े-बड़े होटल, शॉपिंग मॉल, मैरिज पैलेस, मैरिज हाल, आलीशान भवन व शोरूम बने हुए हैं। यह सब निजी हैं लेकिन हैरानी की बात है कि शहर मंे एक भी सामुदायिक भवन नहीं है, जहां पर लोग विशेषकर गरीब वर्ग शादी-विवाह व अन्य कार्यक्रम कम खर्चे में संपन्न करवा सके। सालों से नगर परिषद द्वारा प्रस्तावित सामुदायिक भवन का कार्य ठंडे बस्ते में पड़ा है। शहर की जनता सवाल पूछ रही है कि आखिरकार पांवटा साहिब में सामुदायिक भवन कब बनेगा। जानकारी के मुताबिक आज के दौर में हर छोटे से छोटे गांव में सामुदायिक भवन बन गए हैं जहां पर लोग अपने सामूहिक व निजी कार्य संपन्न करवा सकते हैं, लेकिन पांवटा शहर अभी तक इस सुविधा से महरूम है। सामुदायिक भवन न होने के कारण निजी होटल व मैरिज रिजॉर्ट वालों की चांदी हो रही है और गरीब जनता लुट रही है। अब तो पांवटा नगर में रहने वाले मध्यम व गरीब वर्ग के लोग कहते सुनाई देते हंै कि क्या उनका कसूर सिर्फ इतना है कि वह शहर में रहते हैं। इससे अच्छा तो किसी गांव मंे रह लेते तो कारज इतने महंगे न पड़ते। उधर, इस बारे नगर परिषद के ईओ एसएस नेगी सहित चेयरमैन कृष्णा धीमान व वाइस चेयरमैन नवीन शर्मा ने बताया कि नगर में सामुदायिक भवन बनाने का कार्य जल्द पूरा करवाया जाएगा। यह भवन एमसी कांप्लेक्स के पास बनाया जाएगा, जिसमें ग्राउंड में पार्किंग और उसके उपर एक बड़ा सामुदायिक हाल बनाया जाएगा। भवन के लिए रूकी हुई गतिविधियां आरंभ करवाई जा रही हैं, ताकि गरीब वर्ग के लोगों को भी कम पैसों मंे सामुदायिक भवन की सुविधा का लाभ मिल सके। गौर हो कि पांवटा नगर मंे विभिन्न समुदाय के लोग रहते हैं। इनमें से अधिकतर मजदूर वर्ग के लोग औद्योगिक इकाइयों में कार्य करते हैं जो अपने बच्चों की शादी व अन्य धार्मिक व सामाजिक आयोजन के दौरान आयोजन स्थल पर ज्यादा खर्च नहीं कर पाते।

दो दशक पुरानी हैं सामुदायिक भवन की मांग

जानकारी के मुताबिक पांवटा में सामुदायिक भवन की मांग करीब दो दशक पुरानी है, लेकिन अभी तक इसे अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है। हैरत है कि आज एक छोटे से गांव में भी सार्वजनिक कार्य व शादी विवाह समारोह के लिए सामुदायिक भवन बना हुआ है, लेकिन पांवटा जैसा विकासशील शहर इस सुुविधा से अभी तक वंचित है। हालांकि पांवटा साहिब में कई मैरिज व पार्टी पेलेस बने हैं, लेकिन आम आदमी इसका खर्च नहीं उठा सकता।

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