कभी करते थे नौकरी, आज दे रहे हैं रोजगार

गरेट —जीवन में कुछ कर गुजरने का जनून हो तो कड़ी मेहनत के साथ अगर पत्थर में भी बीज बो दिया जाए तो उसे पसीने से सींच कर अंकुर पैदा किया जा सकता है। ठीक ऐसा ही करिश्मा आसमान की ऊंचाई नाप रहे उद्योगपति सुरेश शर्मा व भीम सिंह ठाकुर की जोड़ी ने कर दिखाया है। करीब आठ साल पहले इन्हें उद्योग प्रबंधन की कोई खासी जानकारी नहीं थी। सुरेश शर्मा एक उद्योग में खुद नौकरी किया करते थे तो भीम सिंह ठाकुर ठेकेदार थे लेकिन जब इन दोनों ने एक साथ मिलकर लोगों को रोजगार उपलब्ध करने की ठानी तो उस युवा पीढ़ी के लिए भी मिसाल बन बैठे जो रोजगार की तलाश में अपने हुनर को अंदर ही अंदर दबाए रहते हैं। करीब आठ साल पहले चंद लाख रुपए से शुरू किया गया उद्योग आज प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से पांच सौ लोगों को रोजगार उपलब्ध करवा रहा है। शनिवार को उद्योग मंत्री विक्रम ठाकुर ने इनके द्वारा शुरू किए गए अवनी कास्टटेक उद्योग में सात करोड़ रुपए के निवेश से स्थापित वीविंग यूनिट का शुभारंभ किया। सुरेश शर्मा इसी औद्योगिक क्षेत्र में एक उद्योग में नौकरी किया करते थे। हालांकि जमा पूंजी भी इतनी नहीं थी कि खुद का व्यापार कर सकें लेकिन हौसले की पूंजी बेशुमार थी। वर्ष 2011 में इन्हें जब ठेकेदार भीम सिंह ठाकुर का साथ मिला तो दोनों ने मिल कर ल्युमिनस उद्योग में बनने वाली इन्वर्टर बैटरी में लगने वाले सामान को तैयार करने के लिए इनसेलरी यूनिट लगा लिया। हालांकि ये उद्योग महज तीन कर्मचारियों के साथ शुरू किया गया और कड़ी मेहनत के दम पर इन्होंने इस इंडस्ट्री में खुद को स्थापित कर लिया और प्रदेश के कई अन्य बैटरी उद्योगों को भी बैटरी का सामान उपलब्ध करवाने लगे। कुछ ही सालों में ये उद्योग प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से करीब डेढ़ सौ लोगों को रोजगार देने लगा। इसी बीच बैटरी में प्रयोग किए जाने वाले टयूबलर बैग का यूनिट भी स्थापित किया गया और अब इसके लिए प्रयोग किया जाने वाला टेक्नीकल टेक्सटाइल भी अब इसी उद्योग में ही तैयार करने के लिए सात करोड़ रुपए के निवेश से वीविंग यूनिट की स्थापना कर डाली है। ये यूनिट करीब डेढ़ सौ लोगों को प्रत्यक्ष व इतने ही लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मुहैया करवाएगा। बकौल सुरेश शर्मा युवा अब नौकरी ढूंढने की बजाय दूसरों को नौकरी देने के साधन ढूंढे। उनका कहना है कि अब तक सरकार द्वारा भी खुद का इंटरप्रन्योर शुरू करने के लिए मदद की जा रही है। इसलिए युवा कड़ी मेहनत के साथ अब अपना रास्ता खुद तय करें।

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