कहानी : सफाई का मोल

रविवार की सुबह थी। बच्चे सुबह ही उठ गए। ब्रश किया, फुटबाल लिया और चल पड़े खेलने। यह वही तिकड़ी थी, जिसे सवेरे स्कूल भेजने के लिए पांच-पांच मिनट पर आवाजें लगानी पड़ती थी। पर आज छुट्टी थी न। दादी और बड़ी मम्मी बागीचे में व्यस्त नजर आईं। उन्हें संतोष हुआ कि छोटी मम्मी निश्चत ही रसोई में नाश्ता तैयार कर रही होंगी। जल्दी जूते उतार कर भीतर भागे तो छोटी मम्मी दुपट्टा कमर में लपेटती हुई बाहर आकर बोलीं, नाश्ता टेबल पर रखा है। फिर बागीचे में जाकर काम में लग गईं। बच्चे , सवेरे जाने की ऐसी जल्दी मचाते कि लाख बोलने पर भी दूध न पीते। खेल कर लौटते तो पेट में चूहे दौड़ रहे होते। यूनुस ने व्याकुलता से रोटी का डिब्बा खोला, इस आशा से कि समोसे-कचौड़ी अथवा पूरी होगी। परांठे देख कर सब के मुंह लटक गए। उफ ठंडे परांठे। अनीस ने मुंह बना कर कहा। और सिर्फ आमलेट। वह भी ठंडा… खामोशी से खाओ भोेजन को बुरा नहीं कहते। इद्रीस ने समझदारी दिखाई। नाश्ता करके तीनों एक-दूसरे का मुंह ताकने लगे। शब्द मुंह से न निकले, पर मन की भाषा में बात होने लगी। बड़ी मम्मी कहती हैं कि रविवार के दिन ही तो तुम लोग नाश्ता करते हो।   छोटी मम्मी तो प्रायः रात ही को पूछ लेती है कि सवेरे क्या खाओगे। हम लोग खेल कर वापस आते हैं तो ताजा नाश्ता मिलता है। उसी समय मुन्नी ने आकर पूछा, भाई जान आज किस की टीम जीती? उस के प्रश्न का उत्तर न देकर इद्रीस ने तुरंत पूछा, मुन्नी तुझे पता है आज नाश्ते में कोई चटपटी चीज क्यों नहीं बनी? पता है, मुन्नी ने शांति से कहा। तो बताओ न। क्यों नहीं बनी? इसलिए नहीं बनी कि मम्मी लोग दादी के साथ बागीचे में व्यस्त हैं। मुन्नी इतना बोल कर बागीचे की ओर बढ़ गई। तीनों लड़के झूले में बैठ गए। बड़ी मम्मी कटर से सुखी टहनियां-पत्ते काट रही थीं, दादी क्यारियों में से कचरा निकाल रही थीं। छोटी मम्मी घमेले में कचरा उठाकर फेंक रही थीं। दादी जान हम कुछ सहायता करें, अनीस ने पूछा। जी नहीं शुक्रिया, छोटी मम्मी तत्पराता से बोलीं। आप तीनों झूले में बैठकर बहुत अच्छे लग रहे हैं। दादी ने बात संभाली, रहने दो तुम्हारे हाथ गंदे हो जाएंगे। आखिर आप लोग क्यों कर रही हो? इंद्रीस ने आश्चर्य से पूछा । आंगन बना रहे हैं, बागीचा सजा रहे हैं। अब तुम लोगों के पापा भी हमारा साथ देंगे। जून का महीना है। धूप और गर्मी में तेजी आ गई है। पक्षियों के लिए प्याऊ बनेंगे। घनी झाडि़यों में झूले बनेंगे। यूनुस ने अपनी बुद्धि के अनुसार तर्क दिया। तो आप लोग ये सब क्यों कर रही हैं। माली बाबा को बुला लेतीं, उनसे करवा लेतीं। अपना घर है अपने घर को सजाने संवारने में दूसरों को क्यों बुलाएं? छोटी मम्मी ने जवाब दिया। अनीस ने कहा हमसे बोलते हम कर देते। मम्मियों ने दादी की तरफ देख कर कहा कि आंगन सजाने के लिए पहले सफाई करनी पड़ती है और सफाई को आप लोग गंदा काम समझते हो। क्योंकि जब भी हम आपको सफाई के लिए बोलते आप बोलते सफाई गंदा काम है और खेलने के लिए चले जाते। यूनुस ने बड़ी मम्मी के हाथ से झाडू लिया, तो अनीस ने छोटी मम्मी से घमेला ले लिया। वे दोनों घर के भीतर चली गईं। छोटे पापा, बड़े पापा भी आ गए… काम में गति आई, प्याऊ लग गए, झूले लटकने लगे, आंगन सजने लगा। कचरा रोड के किनारे बने कूड़ाघर में डालकर बच्चे घर के भीतर गए। परिवार के सदस्यों मिल कर गरमागर्म समोसों का नाश्ता किया गया। जैसे स्वच्छता अभियान के अंतर्गत स्थानीय विभाग की ओर से सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है। वह सीटी बजा-बजा कर अपने आने की सूचना देता है, तो हम कहते हैं कचरे वाला आया है। भला कहिए तो वह कचरे वाला कैसे हुआ तो सफाई वाला हुआ न, दादी ने कहा। मेरे बच्चों ने सफाई का काम अपने हाथों में लेकर पूरे घर को सजा दिया।

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