कांगड़ा एयरपोर्ट-सीयू पर हलचल तेज

धर्मशाला    – विधानसभा उपचुनाव के बहाने कांगड़ा जिला की बड़ी एवं महत्त्वाकांक्षी परियोजनाओं पर सरकार ने फिर से हलचल शुरू कर दी है। कांगड़ा एयरपोर्ट, केंद्रीय विश्वविद्यालय और स्मार्ट सिटी धर्मशाला तीनों बड़ी परियोजनाओं की फाइलों पर जमी धूल को हटाते हुए इन्हें फिर से खोलने के निर्देश दिए गए हैं। इसके चलते कांगड़ा एयरपोर्ट की खसरा वाइज नाप-नपाई का काम शुरू हो गया है, तो स्मार्ट सिटी के कार्यों को भी गति देने के लिए केंद्रीय टीम ने दो दिन तक धर्मशाला का प्रवास कर स्पॉट विजिट किया। इतना ही नहीं, गुरुवार को शिक्षा निदेशालय व केंद्रीय विश्वविद्यालय प्रबंधन के बीच भी लटकी परियोजना को गति देने को लेकर धर्मशाला में चर्चा हुई। धर्मशाला में विधानसभा के लिए उपचुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में प्रदेश सरकार जनता एवं एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर जनता से जुड़े उन मुद्दों को हल करने के लिए फाइलों को खुलवा रही है, जिन पर वह घिर सकती है। लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का करिश्मा भले ही लोगों के सिर चढ़कर बोला हो, लेकिन विधानसभा चुनावों के दौरान बड़ी परियोजनाओं पर काम शुरू नहीं हो पाया तो जनता को सरकार को कठघरे में खड़ा कर सकती है। इसी के चलते अब मुख्यमंत्री कांगड़ा पर फोकस करने के अलावा उन तमाम बड़ी परियोजनाओं पर भी ध्यान देने लगे हैं, जो लंबे समय से लटकी हुई हैं। इसी कड़ी में स्मार्ट सिटी धर्मशाला के कार्यों को गति देने के लिए धर्मशाला पहुंची केंद्रीय टीम के लौटते ही गुरुवार को शिमला से उच्च शिक्षा निदेशक डा. अमरजीत पहुंच गए। उन्होंने अन्य मसलों के अलावा केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री से विश्वविद्यालय के कार्य को आगे बढ़ाने संबंधी बैठक कर चर्चा की। हालांकि मुख्यमंत्री का प्रवास होने के कारण उपायुक्त व कालेज प्राचार्य न मिलने से पूरे मामले पर फिर से बैठक होगी, लेकिन विवि से जुड़ा मामला अब रफ्तार पकड़ेगा। इसी तरह कांगड़ा एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के लिए भी जिला प्रशासन ने पटवार स्तर से खसरा वाइज रिपोर्ट तैयार करवा ली है। धर्मशाला स्मार्ट सिटी सहित जिला की महत्त्वपूर्ण परियोजनाओं की फाइलों से हटने लगी धूल नए डीसी देंगे गति अचानक उपायुक्त के तबादले के बाद अब नए डीसी इस मामले को संभालते हुए कार्य को गति देंगे। बुद्विजीवी एवं शिक्षाविद विधानसभा उपाचुनाव से  ठीक पहले शुरू हुई इस हलचल को तभी सार्थक मानते हैं, जब धरातल पर कुछ दिखेगा।

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