कांगड़ा-शिमला-हमीरपुर समेत आठ जिलों के डीसी बदले

संदीप कुमार भेजे ऊना, अमित फिर शिमला लौटे, राकेश प्रजापति संभालेंगे कांगड़ा, चार अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारी

शिमला -चुनाव के बाद जयराम सरकार ने पहला बड़ा फेरबदल किया है। प्रदेश सरकार ने आठ जिलों के जिलाधीशों को ट्रांसफर कर सिस्टम को और बेहतर बनाने का गंभीर प्रयास किया है। जिलाधीशों के अलावा चार अन्य अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। प्रदेश के सबसे बड़े जिला कांगड़ा, ऊना, कुल्लू, शिमला, चंबा, हमीरपुर, लाहुल-स्पीति और बिलासपुर को नए जिलाधीश दिए गए हैं। शिमला में फिर से अमित कश्यप को जिलाधीश बनाया गया है। वह अभी तक निदेशक पर्यटन व नगर नियोजन का दायित्व देख रहे थे। कुल्लू के जिलाधीश यूनुस को वहां से बदलकर शिमला में निदेशक पर्यटन लगाया गया है। वह निदेशक टीसीपी का अतिरिक्त कार्यभार भी देखेंगे। डीसी कांगड़ा संदीप कुमार को बदलकर डीसी ऊना लगाया गया है। उपायुक्त बिलासपुर विवेक भाटिया को डीसी चंबा के पद पर तैनाती मिली है। लाहुल-स्पीति के डीसी अश्वनी कुमार चौधरी को सचिव लोक सेवा आयोग लगाया गया है। जिलाधीश ऊना राकेश कुमार प्रजापति को डीसी कांगड़ा लगाया गया है। हमीरपुर की जिलाधीश ऋचा वर्मा को कुल्लू जिला का उपायुक्त लगाया गया है। हरिकेश मीणा उपायुक्त चंबा को डीसी हमीरपुर और डीसी शिमला राजेश्वर गोयल को डीसी बिलासपुर के पद पर तैनात किया गया है। इनके अलावा एडिशनल डीसी शिमला देवश्वेता बनिक को एचपीएमसी का एमडी लगाया गया है। उनके पास बागबानी विकास समिति के परियोजना निदेशक का अतिरिक्त जिम्मा भी रहेगा। विशेष सचिव स्वास्थ्य डा. निपुण जिंदल को एमडी नेशनल हैल्थ मिशन का जिम्मा सौंपा है। इस पद पर तैनात मनमोहन शर्मा के नियुक्ति आदेश बाद में जारी होंगे। अतिरिक्त रजिस्ट्रार सहकारी समिति कांगड़ा के पद तैनात कमलकांत सरोच को डीसी लाहुल-स्पीति के पद पर तैनाती मिली है। जिला पर्यटन अधिकारी मधु चौधरी को सहकारी सभाएं कांगड़ा के रजिस्ट्रार पद का अतिरिक्त कार्यभार भी दिया है।

संदीप कुमार पर थी नजर

लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी के नामांकन के दौरान खातिरदारी करने पर विवादों में घिरे जिलाधीश कांगड़ा संदीप कुमार पर सरकार की टेढ़ी नजर थी। संदीप कुमार को सबसे बड़े प्रशासनिक जिला कांगड़ा से कहीं छोटे जिला ऊना में डीसी पद पर भेजा गया है। चुनाव आचार संहिता के दौरान नियमों की अवहेलना पर चुनाव आयोग की भी उस समय भौहें तनी हुई थीं। प्रदेश सरकार ने उस दौरान किसी तरह मामला संभाल लिया था।

 

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