कालेज लेक्चरर को एकमुश्त दे दिया 68 लाख एरियर

उच्च शिक्षा निदेशालय का कारनामा, प्रदेश सरकार से मंजूरी लेना भी नहीं समझा जरूरी

शिमला  – उच्च शिक्षा निदेशालय ने हिमाचल सरकार के नियमों को ताक पर रखकर एक कालेज लेक्चरर को 68 लाख की राशि एकमुश्त जारी कर दी। राज्य सरकार के खजाने को अब तक की सबसे बड़ी चपत लगाने वाले इस कारनामे के बाद अफसरशाही में हड़कंप मच गया है। मामला बैजनाथ कालेज की एक महिला कर्मचारी का है। कालेज का सरकारी अधिग्रहण होने के कारण वर्ष 2007 में महिला कर्मचारी को लेक्चरर काडर का स्केल दिया गया। ठीक 12 साल बाद महिला कर्मचारी पर दरियादिली दिखाते हुए निदेशालय ने उसे प्रोफेसर रैंक पर हायर स्केल का 68 लाख का एरियर दे दिया। हैरत है कि इसके लिए शिक्षा विभाग के निदेशक ने राज्य सरकार की मंजूरी लेना भी जरूरी नहीं समझा। इस कारण अब सचिवालय से लेकर निदेशालय तक 68 लाख की इस रिकवरी पर आला अफसरों के हाथ-पांव फूल गए हैं। इस कार्यवाही के बाद निदेशालय बैकफुट पर आ गया है। चूंकि जिस शिक्षिका को यह एरियर जारी किया है, उसे निदेशालय अब वापस मांग रहा है। बाकायदा निदेशालय की तरफ से शिक्षिका को रिकवरी लेटर जारी किया गया है। जानकारी मिली है कि निदेशालय के रिकवरी लेटर पर शिक्षिका ने न्यायालय से स्टे ऑर्डर भी प्राप्त कर लिया है। बताते चलें कि उच्च शिक्षा निदेशालय से उक्त शिक्षिका को 67 लाख 51 हजार 933 की राशि जारी की गई है। एक  साथ इतनी राशि देने के पीछे क्या कारण रहे हैं, इस पर भी शिक्षा विभाग के पास कोई जवाब नहीं है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि उच्च शिक्षा विभाग में इस तरह के मामले सामने आए हों। पहले भी विभाग के अधिकारियों की लापरवाही की वजह से शिक्षा निदेशालय कई सवालों के घेरे में आ चुका है। अब जब एक बार फिर उच्च शिक्षा निदेशालय से शिक्षिका को बारह साल का एरियर एक साथ लाखों में जारी हुआ है, तो विभाग के अधिकारियों में भी हड़कंप मच गया है। विभागीय जानकारी के अनुसार उक्त शिक्षिका वर्तमान में कांगड़ा जिला के एक कालेज में सहायक प्राचार्य के रूप में सेवाएं दे रही हैं। फिलहाल उच्च शिक्षा निदेशालय ने इतनी ज्यादा राशि एक साथ क्यों जारी की, वहीं इतने समय से शिक्षिका के एरियर को क्यों रोके रखा, इस तरह के कई सवाल उठ रहे हैं, जिसका शिक्षा विभाग को सरकार को भी जवाब देना होगा। सरकार के पास यह मामला पहुंच चुका है। बताया जा रहा है कि राज्य सरकार ने भी उच्च शिक्षा निदेशक व शिक्षा विभाग के संयुक्त नियंत्रक वित्त एवं लेखा से इस मामले पर स्पष्टीकरण मांगा है। इस दौरान अब विभाग को सरकार को बताना होगा कि एक साथ इतनी राशि देने की वजह है, क्या है, वहीं इस बारे में सरकार क्यों अवगत करवाया। इसके अलावा यह भी बताना होगा कि रिकवरी लेटर उक्त महिला को क्यों जारी किया गया। फिलहाल इस मामले में जांच के बाद क्या पहलु सामने आते हैं, यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन सवाल तो यह है कि शिक्षा विभाग ने बारह साल बाद दिए गए एरियर की राशि जारी करने से पहले सरकार की भी परमिशन क्यों नहीं ली।

तीन साल तक का मिलता है एरियर – जानकारी के अनुसार सरकारी विभाग में काम करने वाले कर्मचारियों को तीन साल बाद एरियर दिया जाता है। अगर किसी कारणवश तीन से ज्यादा सालों तक भी किसी को एरियर नहीं मिला है, तो उन्हें सरकार या कोर्ट से इस बारे में परमिशन लेनी पड़ती है। सरकार से परमिशन मिलने के बाद ही यह राशि जारी होती है। 

बिना सरकार की मंजूरी के किसी कर्मचारी को एकमुश्त 68 लाख का एरियर जारी करना बेहद चौंकाने वाला मामला है। उच्च शिक्षा निदेशक से इस पूरे मामले में जांच रिपोर्ट तलब की गई है। इस तरह के मामले आम तौर पर कैबिनेट में मंजूरी के लिए लाए जाते हैं    

-केके पंत, प्रधान सचिव, शिक्षा, हिमाचल प्रदेश

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