काश! सड़क पक्की होती, तो नहीं बुझता घर का चिराग

घुमारवीं—घुमारवीं की कसारू पंचायत के गांव बबैली में रविवार सुबह एक परिवार पर कहर टूट पड़ा। मधुमक्खियों के झंुड के हमले से शहतूत के पेड़ पर घास काटने चढ़े एक युवक की गिरकर मौत हो गई, जबकि खेतों में काम कर रहे उसके परिजनों को मधुमक्खियों ने अपने डंक से घायल कर दिया। इस दर्दनाक घटना में एक परिवार का चिराग बुझ गया। घायल युवक व उसके परिजनों को सिविल अस्पताल घुमारवीं पहुंचाया गया। यहां पर युवक ने दम तोड़ दिया। गांव के लोगों व परिजनों को अफसोस है कि लाख कोशिश करने के बावजूद वह घायल युवक को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचा सके। अस्पताल पहुंचने पर भी चिकित्सकों ने यही कहा कि थोड़ी देर हो गई। लोगों को रंज है कि यदि गांव को जाने वाली सड़क पक्की होती, तो शायद आज उनके बेटे अशोक की जान बच जाती। एक बेटे के सिर से पिता का साया, पत्नी की मांग का सिंदूर तथा माता-पिता का चिराग बुझा नहीं होता। जानकारी के मुताबिक निहारी से कलोह व बबैली गांव के लिए संपर्क सड़क का निर्माण किया गया है, लेकिन दो दशकों बाद भी सड़क को पक्का नहीं किया गया है। कच्ची सड़क की हालत ठीक न होने के कारण छोटे वाहन यहां से नहीं गुजरते हैं। सड़क की हालत दुरुस्त न होने के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती। जीप व ट्रालांे को भी दो किलोमीटर सफर करने में काफी समय लग जाता है, जिसके कारण उपचार का इंतजार कर रहे मरीज की जिंदगी संकट में फंस जाती है। रविवार सुबह भी बबैली गांव में कुछ ऐसा ही घटित हुआ। यहां पर मधुमक्खियों के हमले से घायल लोगों को अस्पताल पहुंचाने के लिए जीप की जरूरत पड़ी, लेकिन जब तक जीप कच्ची सड़क से गुजरकर हिचकोले खाती हुई गांव तक पहुंचती तथा बाद में घायलों को जीप में बिठाकर उसी सड़क से ले जाकर सिविल अस्पताल घुमारवीं पहुंचाया जाता। तब तक काफी देर हो चुकी थी। जख्मों व मधुमक्खियों के डंक के ताव को युवा अशोक कुमार सहन नहीं कर सका तथा उसने दम तोड़ दिया। कसारू पंचायत के उपप्रधान अमरजीत चौधरी, राकेश कुमार, राजेश व विद्यासागर सहित अन्य का कहना है कि सड़क को पक्का करने के लिए कई बार सरकार तथा संबंधित विभाग से मांग की, लेकिन सड़क को आज तक पक्का नहीं किया गया। बबैली गांव में रविवार सुबह हुई दर्दनाक घटना ने लोगों को हिला कर रख दिया।

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