किन्नौर में बीच रास्ते में ही हांफने लगीं बसें

रिकांगपिओ —हिमाचल पथ परिवहन निगम रिकांगपिओ  रीजन की बसे न जाने कब कहा खड़ी हो जाए इस का कोई भरोसा नही है। निगम की इन खटारा बसों से कभी भी किसी बड़ी अनहोनी घटने का अंदेश बना रहता है। बताते चले कि रविवार को हिमाचल पथ परिवहन निगम  रिकांगपिओ रीजन की बस नंबर एचपी 25. 2236 तब हांफ गई जब बस अपने गंतव्य स्थान से 8 किलोमीटर दूरी पर थी। बस धर्मपुर से रिकांगपिओ के  लिए आ रही थी। बस ने सुबह आठ बजे रिकांगपिओ बस अड्डे पहुंचनी थी लेकिन बस के खराब होने से बस दिन के 12 बजे अपने गंतव्य स्थान पर पहुंची। बस में यात्रा कर रहे यात्रियों का कहना है कि इस दौरान बस के तीखे मोड़ पर फंस जाने से कई अन्य वाहनों को यातायात करने में भी खासी असुविधा पेश होती रही। इस दौरान बस को घटना स्थल से  रिकांगपिओ वर्क शॉप तब पहुंचाया गया जब वर्क शॉप से मेकेनिक मंगवाए गए। इस दौरान बस में सवार यात्रियों को घंटो इंतजार कर दूसरे वाहनों से रिकांगपिओ जाने को मजबूर होना पड़ा।  रिकांगपिओ डिपो की बसों की यह कहानी कोई पहली नही है बल्कि इस से पूर्व  भी कई बसे आधे रास्ते में हांफती नजर आती रही है। हैरानी की बात तो यह है कि निगम कमाई के चक्कर मे कैसे खतरनाक पहाड़ी क्षेत्रों में खटारा बसों को आए दिन सडको पर दौड़ा कर लोगों की जान से खिकवाद कर रही होती हैं। निगम की यह कार्य प्रणाली यात्रियों की सुरक्षा की दृष्टि से ठीक नही है। पुख्ता सूत्र बताते है कि इस समय रिकांगपिओ रीजन में आधा दर्जन से भी अधिक बसे ऐसी है जिन की बुक वेल्यु खत्म हो चुकी है यानी यह बड़े कंडम हो चुकी है। निगम प्रबंधन जनजातीय इलाको में ऐसी बसों को चला कर लोगो के जान माल के साथ खिलवाड़ कर रही है। लोगो की सुरक्षा से जुड़े ऐसे संवेदनशील मामलों पर असवैधनशील होने वाले अधिकारियों के विरूद्ध  कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

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