किसान की आय बढ़ाना सरकार का लक्ष्य

खुंब अनुसंधान निदेशालय चंबाघाट में डा. त्रिलोचन ने कहा, विज्ञान केंद्रों से किसानों तक पहुंचे मशरूम का ज्ञान

सोलन – केंद्र सरकार ने वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी का लक्ष्य रखा है और इसमें मशरूम अग्रणी भूमिका निभा सकता है। यह बात भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के महानिदेशक व कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव डा. त्रिलोचन महापात्रा ने कही। वह खुंब अनुसंधान निदेशालय चंबाघाट में आयोजित कार्यक्रम के दौरान संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पहले सरकार किसान का उत्पादन बढ़ाने पर जोर देती थी, लेकिन अब सरकार किसानों की आय को बढ़ाने पर जोर दे रही है। आजादी के बाद देश में नई तकनीकी आने के कारण उत्पादन में अत्याधिक बढ़ोतरी हुई, जिससे देश में भूखमरी की समस्या दूर हो गई है। किसानों को सभी योजनाओं की जानकारी होनी चाहिए व अव्यवस्थाओं को ठीक करके ही आमदनी बढ़ाई जा सकती है। इसके लिए जरूरी है कि उत्पादों की ब्रांडिंग की जाए, ताकि किसानों को मशरूम के पोषक तत्त्वों की जानकारी मिल सके।  कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से भी मशरूम उत्पादन की जानकारी किसानों तक पहुंचाई जा सकती है। इससे पूर्व भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली के संयुक्त निदेशक डा. जेपी शर्मा ने कहा कि देश में प्रति व्यक्ति जमीन व पानी की कमी हो रही है, जिसमें मशरूम उत्पादन आय का एक उत्तम स्रोत बन सकता है। उन्होंने मशरूम के मूल्य संवर्द्धन उत्पादों को तैयार करने पर बल दिया, जिससे कि किसानों की आय में बढ़ोतरी हो सके। वहीं, उप महानिदेशक डा. आनंद कुमार सिंह ने बताया कि निदेशालय का स्पॉन उत्पादन पिछले दो वर्ष 7-10 टन था जो वर्तमान में बढ़कर 40-42 टन हो गया है।  इससे पूर्व खुंब अनुसंधान निदेशालय चंबाघाट (सोलन) के निदेशक डा. वीपी शर्मा ने सभी अतिथियों एवं किसानों का कार्यक्रम में भाग लेने पर स्वागत किया। उन्होंने तीनों विशिष्ट अतिथियों को शॉल व हिमाचली टोपी पहनाकर उनका अभिनंदन किया।

मशरूम की खेती के लिए तैयार करें चार्ट

डा. महापात्रा ने कहा कि पूरे देश में जलवायु के आधार पर मशरूम की खेती की रूपरेखा तैयार करने संबंधी चार्ट तैयार किया जाए तथा किस राज्य में कौन सी प्रजाति उगाई जा सकती है, इसका ब्यौरा तैयार किया जाए। मशरूम के पोषण तत्त्वों व इसके औषधीय गुणों को अनुसंधान के कार्यों द्वारा साझा किया जाए।

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