किसी अजूबे से कम नहीं हैं महाभारत के पात्र

स्वेदजा 1000 कवच के साथ जन्मा था और रक्तजा 1000 हाथ और 500 धनुष के साथ। स्वेदजा और रुक्तजा में भयंकर युद्ध होता है। स्वेदजा रक्तजा के 998 हाथ काट देता है और 499 धनुष तोड़ देता है। वहीं रक्तजा स्वेदजा के 999 कवच तोड़ देता है। रक्तजा बस हारने ही वाला होता है। भगवान विष्णु समझ जाते हैं कि रक्तजा हार जाएगा। इसलिए वे उस युद्ध को शांत करवाते हैं। स्वेदजा दानवीरता दिखाते हुए रक्तजा को जीवनदान देता है। भगवान विष्णु स्वेदजा की जवाबदेही सूर्यनारायण को सौंपते हैं और रक्तजा की इंद्रदेव को…

-गतांक से आगे…

स्वेदजा 1000 कवच के साथ जन्मा था और रक्तजा 1000 हाथ और 500 धनुष के साथ। स्वेदजा और रुक्तजा में भयंकर युद्ध होता है। स्वेदजा रक्तजा के 998 हाथ काट देता है और 499 धनुष तोड़ देता है। वहीं रक्तजा स्वेदजा के 999 कवच तोड़ देता है। रक्तजा बस हारने ही वाला होता है। भगवान विष्णु समझ जाते हैं कि रक्तजा हार जाएगा। इसलिए वे उस युद्ध को शांत करवाते हैं। स्वेदजा दानवीरता दिखाते हुए रक्तजा को जीवनदान देता है। भगवान विष्णु स्वेदजा की जवाबदेही सूर्यनारायण को सौंपते हैं और रक्तजा की इंद्रदेव को। वह इंद्रदेव को वचन देते हैं कि अगले जन्म में रक्तजा अपने प्रतिद्वंद्वी स्वेदजा का वध अवश्य करेगा। द्वापर युग में रक्तजा अर्जुन और स्वेदजा कर्ण के रूप में जन्म लेते हैं और अर्जुन अपने सबसे महान प्रतिद्वंद्वी कर्ण की युद्ध के नियमों के विरुद्ध हत्या करते हैं।

नकुल

नकुल महान हिंदू काव्य महाभारत में पांच पांडवों में से एक था। नकुल और सहदेव, दोनों माता माद्री के असमान जुड़वां पुत्र थे जिनका जन्म दैवीय चिकित्सकों अश्विन के वरदान स्वरूप हुआ था जो स्वयं भी समान जुड़वां बंधु थे। नकुल का अर्थ है परम विद्वता। महाभारत में नकुल का चित्रण एक बहुत ही रूपवान, प्रेम युक्त और बहुत सुंदर व्यक्ति के रूप में किया गया है। अपनी सुंदरता के कारण नकुल की तुलना काम और प्रेम के देवता कामदेव से की गई है। पांडवों के अंतिम और तेरहवें वर्ष के अज्ञातवास में नकुल ने अपने रूप को कौरवों से छिपाने के लिए अपने शरीर पर धूल लीप कर छिपाया। श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर का वध करने के पश्चात नकुल द्वारा घुड़ प्रजनन और प्रशिक्षण में निपुण होने का महाभारत में अभिलेखाकरण है। वह एक योग्य पशु शल्य चिकित्सक था जिसे घुड़ चिकित्सा में महारत प्राप्त थी। अज्ञातवास के समय में नकुल भेष बदल कर और अरिष्ठनेमि नाम के छद्मनाम से महाराज विराट की राजधानी उपपलव्य की घुड़शाला में शाही घोड़ों की देखभाल करने वाले सेवक के रूप में रहा था। वह अपनी तलवारबाजी और घुड़सवारी की कला के लिए भी विख्यात था। अनुश्रुति के अनुसार वह बारिश में बिना जल को छुए घुड़सवारी कर सकता था। नकुल का विवाह द्रौपदी के अतिरिक्त जरासंध की पुत्री से भी हुआ था। नकुल नाम का अर्थ होता है जो प्रेम से परिपूर्ण हो और इस नाम की नौ पुरुष विशेषताएं हैं-बुद्धिमत्ता, सकेंद्रित, परिश्रमी, रूपवान, स्वास्थ्य, आकर्षण, सफलता, आदर और शर्त रहित प्रेम।

सहदेव

सहदेव महाभारत में पांच पांडवों में से एक और सबसे छोटा था। वह माता माद्री के असमान जुड़वां पुत्रों में से एक थे जिनका जन्म देव चिकित्सक अश्विनों के वरदान स्वरूप हुआ था। जब नकुल और सहदेव का जन्म हुआ था तब यह आकाशवाणी हुई कि शक्ति और रूप में ये जुड़वां बंधु स्वयं जुड़वां अश्विनों से भी बढ़कर होंगे।

कर्ण

कर्ण महाभारत के सबसे प्रमुख पात्रों में से एक है। कर्ण को महाभारत का महानायक माना जाता है। कर्ण महाभारत के सर्वश्रेष्ठ धनुर्धारी थे। भगवान कृष्ण और भगवान परशुराम ने स्वयं कर्ण की श्रेष्ठता को स्वीकार किया था। कर्ण की वास्तविक मां कुंती थी। कर्ण का जन्म कुंती के पांडु के साथ विवाह होने से पूर्व हुआ था। कर्ण दुर्योधन का सबसे अच्छा मित्र था और महाभारत के युद्ध में वह अपने भाइयों के विरुद्ध लड़ा। वह सूर्य का पुत्र था।

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