कीरतपुर-नागचला फोरलेन में ठेकेदारों के फंसे 150 करोड़

एनएचएआई कार्यालय पर दिया धरना, 15 दिन में पैसे नहीं तो सुसाइड करने की धमकी

 मंडी –कीरतपुर नागचला फोरलेन का काम करने वाले 50 से अधिक ठेकेदारों के 150 करोड़ रुपए फंस गए हैं। पिछले डेढ़ वर्ष पैसे का भुगतान ठेकेदारों हो सका है। कीरतपुर-नागचला का अधूरा काम करने वाली कंपनी आईएल एंड एफएस अब दिवालिया हो चुकी है, लेकिन इन ठेकेदारों के पैसे न तो अब एनएचएआई चुकाने को तैयार है और न ही दिवालिया हो चुकी कंपनी पैसे दे रही है। पैसे न मिलने की वजह से यह ठेकेदार भी कंगाली के कगार पर पहुंच गए हैं, जिससे गुस्साए ठेकेदारों ने मंगलवार को मंडी के चक्कर स्थित एनएचएआई के परियोजना निदेशक कार्यालय का घेराव किया और बाद में अपनी मांगों को लेकर परियोजना निदेशक को एक ज्ञापन सौंपा। ठेकेदारों ने परियोजना निदेशक को चेताया कि अगर 15 दिन के अंदर उनके पैसे का भुगतान नहीं किया गया तो वे फोरलेन का काम पूरी तरह से रोक देंगे। इसके बाद भी अगर पैसा नहीं मिला तो आत्महत्या जैसा बड़ा कदम उठाने के लिए ठेकेदारों को मजबूर होना पडे़गा। परियोजना निदेशक कार्यालय के बाहर आत्मदाह करेंगे। ठेकेदार एसोसिएशन के पदाधिकारी अपनी मांगों को लेकर बुधवार को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को ज्ञापन सौंपेंगे। बता दें कि कीरतपुर-नागचला फोरलेन का काम आईएल एंड एफएस को दिया गया था, जिसके बाद कंपनी ने आगे आईटीएनएल कंपनी के जरिये हिमाचल व पंजाब के करीब 60 ठेकेदारों ने सबलेटिंग पर काम किया था। फ ोरलेन कार्य के लिए अधिकांश ठेकेदारों ने आईटीएनएल को मशीनरी उपलब्ध करवाई थी। ठेकेदार यूनियन के अध्यक्ष अशोक कुमार और महासचिव हेमराज शर्मा ने बताया कि जेसीबी, डंपर व पोकलेन आदि खरीदने के लिए एक एक ठेकेदार ने बैंक से 50 से 60 लाख रुपए ऋण लिया है। आईटीएनएल अब दिवालिया घोषित हो चुकी है। इससे ठेकेदारों का करीब 150 करोड़ रुपए फंस गया है। डेढ़ साल से पैसा न मिलने से कई ठेकेदार भी कंगाल हो चुके हैं। बैंक कई ठेकेदारों की संपत्ति तो कुछ एक की मशीनरी की कुर्की करवा चुका है। इससे ठेकेदारों के समक्ष रोजी-रोटी के लाले पड़ गए हैं। उन्हांेने बताया कि पैसे के लिए ठेकेदार कभी आईटीएनएल तो कभी एनएचएआई कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक मात्र कोरे आश्वासन ही मिले हैं। वहीं, एनएचएआई के निदेशक योगेश चंद्रा ने एसोसिएशन के पदाधिकारियों को आश्वस्त किया कि वह इस मामले को एनएचएआई के उच्च अधिकारियों के समक्ष रखेंगे। उन्होंने एसोसिएशन के लोगों को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल के समक्ष याचिका दायर करने की सलाह दी।

 

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