कृषि उपज मंडी कांगड़ा की बल्ले-बल्ले

कांगड़ा—कृषि उपज मंडी समिति जिला कांगड़ा का दायरा पिछले वर्षों में बढ़ा है और आय में भी रिकार्ड वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले वर्षों में ऐसा पहली मर्तबा हुआ है कि समिति का  राजस्व छह करोड़ रुपए को भी पार कर गया है। सचिव राजेश डोगरा ने बताया कि  वित्त वर्ष 2018-19 में कांगड़ा कृषि उपज मंडी समिति ने पहली बार छह करोड़ रुपए के राजस्व का आंकड़ा छुआ है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष पांच करोड़ 70 लाख रुपए का लक्ष्य था, लेकिन समिति ने छह करोड़ 36 हजार 686 रुपए का राजस्व प्राप्त किया है। मंडी समिति कांगड़ा का शुद्ध लाभ दो करोड़ 91 लाख रुपए रहा है । श्री डोगरा ने बताया कि समिति अपने संचालन के लिए हिमाचल प्रदेश कृषि विपणन बोर्ड  अधिनियम 2005 के तहत कृषि से संबंधित अधिसूचित मद पर एक फीसदी मंडी शुल्क पंजीकृत व्यापारियों से लेती है। इस शुल्क का 25 प्रतिशत भाग समिति  विपणन बोर्ड को  शिमला भेजती है एवं बाकी की राशि समिति अपने संचालन पर और जिले के विकास कार्य पर खर्च करती है। उन्होंने बताया कि जसूर पालमपुर एवं कांगड़ा सब्जी मंडी को राष्ट्रीय कृषि बाजार ई-नेम से जोड़ा गया है और अभी तक लगभग पांच करोड का ऑनलाइन व्यापार इसके तहत किया गया है। उन्होंने बताया कि चालू वित्त वर्ष के  लिए फील्ड स्टाफ  के साथ बैठक में राजस्व का लक्ष्य 10 फीसदी बढ़ा दिया गया है। उन्होंने व्यापारियों को ईमानदारी से एक प्रतिशत मंडी शुल्क अदा करने के लिए आभार व्यक्त किया है और रिकार्ड राजस्व जुटाने के लिए समिति स्टाफ  का धन्यवाद किया है। कृषि उपज मंडी समिति का प्रशासन सचिव के अधीन है, जहां तक मंडी समिति की आय का सवाल है तो पिछले वर्षों में समिति की आय में बेतहाशा वृद्धि हुई है। वर्ष 1981 में मंडी समिति की आय महज 17 हजार 221 रुपए थी जो वर्ष 2018 में बढ़ कर छह करोड़ रुपए पहुंच गई है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 1981 में कांगड़ा में सब्जी मंडी का निर्माण किया गया था तब पंजीकृत आढ़तियों की संख्या 36 थी। आज जिला में 10 मंडियां हंै और आढ़तियों का आंकड़ा 436 पहुंच गया है। ई-नेम के तहत पंजीकृत तीन मंडियों में 101 ट्रेडर्स और 84 कमीशन एजेंट रजिस्टर्ड किए गए हैं। इसके अलावा 5625 किसान रजिस्टर्ड किए गए हैं। दीगर है कि कृषि उपज मंडी समिति जिला कांगड़ा का दायरा पिछले वर्षों में बढ़ा है और जिला में आढ़तियों की संख्या में भी वृद्धि हुई है ।

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