केंद्र ने घटाए 18 जरूरी दवाओं के दाम

नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथारिटी ने किया संशोधन, शुगर-संक्रमण और अल्सर की दवाएं शामिल

बीबीएन – नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथारिटी ने 18 आवश्यक दवाओं की खुदरा कीमतें घटाई हैं। जिन दवाओं की कीमतों में संशोधन किया है, उनमें मधुमेह, संक्रमण, अल्सर व दर्द निवारक दवाएं शामिल हैं। नियामक ने कीमतों में यह संशोधन औषधि (कीमत नियंत्रण) आदेश, 2013 के तहत किया है। नियामक ने जिन औषधियों के खुदरा मूल्य को तय किया है, उनका विनिर्माण एवं विपणन विभिन्न कंपनियां करती हैं। इन आषैधियों में अल्फा लिपोइक, मेथिलकोबालामिन, इनोसिटोल यूएसपी, फॉलिक एसिड, बेन्फोटामाइन, क्रोमियम पॉलीनिकोटिनेट, पाइरिडोक्सीन हाइड्रोक्लोराइड कैप्सूल, वोवेन-1 मिली क्वीन इंजेक्शन, डायक्लोफेनाक, थियोकोलेनिकोसाइड कैप्सूल, एमोक्सिलिलिन व क्लेवुलानिक एसिड टैबलेट शामिल है। आदेश मे स्पष्ट किया गया है कि विनिर्माता तय की गई कीमत से ज्यादा नहीं वसूल सकते अगर ज्यादा राशी वसूल की जाती है तो औषधि (कीमत नियंत्रण) आदेश, 2013 के प्रावधानों के तहत ब्याज सहित ओवरचार्ज की गई राशि विनिर्माता को जमा करवानी होगी।

कैंसर की नौ दवाओं के दाम 87 प्रतिशत घटाए

एनपीपीए ने कैंसर रोधी दवाओं के दामों में भी भारी कमी की है। बीते माह जारी अधिसूचना में एनपीपीए ने नौ कैंसर की दवाओं के दाम 87 प्रतिशत तक कम कर दिए हैं। इन नौ दवाओं में आमतौर पर फेफड़े के कैंसर के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कीमोथेरेपी इंजेक्शन शामिल हैं। संशोधित आदेश के अनुसार पेमएक्सेल ब्रांड के तहत बेची जाने वाली 500 मिलीग्राम की पेमेट्रेक्सेड इंजेक्शन की कीमत 22 हजार से घटाकर दो हजार 800 रुपए कर दिया गया है। इसी तरह एपिक्लोर के ब्रांड के तहत बेची जाने वाली 10 मिलीग्राम एपिरूबिसिन की कीमत 561 के मुकाबले 276.8 रुपए हो गई है। इसके अलावा एर्लोटाज के रूप में बेचे जाने वाले 10 टैबलेट के एर्लोटिनिब 100 मिलीग्राम पैक की कीमत अब एक हजार 840 रुपए होगी, तो वहीं 150 मिलीग्राम की ताकत वाले 10 टैबलेट पैक की कीमत दो हजार 400 रुपए कर दी गई है। इसी प्रकार जो लानोलिमस के ब्रांड के तहत बेची जाने वाली दवा एवरोलिमस की कीमत में भी भारी कमी की गई है। 0.25 मिलीग्राम की खुराक वाली दवा अब 726 से कम करके 406 रुपए कर दिया गया है।

अब आगे से यह भी होगा

अगले कुछ महीनों में देश में सभी तरह की एलोपैथिक दवाओं की कीमतें मूल्य नियंत्रण के दायरे में आ सकती हैं। सरकार की कसरत अगर रंग लाई तो दवाओं पर 30 फीसदी से ज्यादा का मुनाफा भी नहीं वसूला जा सकेगा।

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